जंगल की जमीन कब्जाने वालों के किसी भी प्रकार के धरने प्रदर्शन पर प्रदेश हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर सरकारी भूमि पर लगाए गए पेड़ों को काटने से रोकने का किसी भी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल ने प्रयास किया तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा।
हाईकोर्ट ने राजनीतिक दलों और एनजीओ को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि कानून के खिलाफ जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। डीजीपी को आदेश दिए हैं कि अवैध कब्जे हटाने वाले क्षेत्रों में कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए जाएं। हाईकोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों को सख्त हिदायत देते हुए कहा है कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि
किसी भी दल का कोई भी नेता या कार्यकर्ता आदेशों की अनुपालना में बाधक न बने। अगर ऐसा होता है तो कोर्ट भारत निर्वाचन आयोग से संबंधित पार्टी की मान्यता को रद्द करने के आदेश देने से भी गुरेज नहीं करेगा। कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों और प्रशासनिक अमले को कानून के साथ खड़े होने को कहा है।
वन भूमि पर अवैध सेब बगीचों को हटाने के दिए हैं आदेश- न्यायाधीश राजीव शर्मा ने 27 फरवरी को जारी आदेशों में तीन महीने के भीतर वन भूमि पर अवैध लगाए गए सेब बगीचों को हटाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि सबसे पहले उन लोगों पर कार्रवाई की जाए, जिन्होंने अपने राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव के चलते अवैध बगीचे कायम रखे हैं।
कोर्ट ने कहा कि अन्य छोटे कब्जाधारियों पर भी कार्रवाई करें। हाईकोर्ट ने सेब बगीचे विकसित करने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार की प्रस्तावित नियमितीकरण की पॉलिसी पर भी पूर्णतया रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने उपमंडल वन अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे अवैध कब्जों से जुड़े मामलों में हर दिन कार्रवाई करें और तुरंत फैसले करें।
कोर्ट ने दस बीघा से कम अतिक्रमण करने वालों से भी सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। इनके खिलाफ भी आपराधिक मामले दर्ज करने को कहा है। कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ ट्रायल को जल्द से जल्द निपटाने के आदेश भी दिए हैं।