हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी की अदायगी करने में देरी करने वाले दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। समय पर वन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी न देने पर अदालत ने कड़ा संज्ञान लिया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने मुख्य अरण्यपाल को तीन महीने में जांच पूरी करने के आदेश दिए है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी पर दी गई ब्याज की रकम दोषी अधिकारियों से वसूली जाए। अदालत ने अपने आदेशों की अनुपालना रिपोर्ट 4 मार्च को तलब की है। बता दें कि हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी की अदायगी न करने पर मुख्य अरण्यपाल के वेतन पर रोक लगा दी थी।
शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता की देय ग्रेच्युटी ब्याज सहित अदा कर दी गई है। समय पर यह राशि अदा न करने के कारण विभाग को 53 हजार रुपये ब्याज के तौर पर अदा करने पड़े। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता को बेवजह अदालत को दरवाजा खटखटाना पड़ा। यदि विभाग समय रहते ग्रेच्युटी अदा कर देता तो ब्याज की रकम बचाई जा सकती थी। याचिकाकर्ता तुला राम को 29 सितंबर 2019 को सक्षम न्यायालय ने याचिकाकर्ता को 1,18,977 रुपये की ग्रेच्युटी के लिए हकदार ठहराया।
इस निर्णय को वन विभाग ने किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता 73 वर्ष पार कर चुका है और वन विभाग उसे ग्रेच्युटी की अदायगी करने में आनाकानी कर रहा है। 6 दिसंबर को हाईकोर्ट ने वन विभाग को आदेश दिए थे कि 15 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता की ग्रेच्युटी की अदायगी की जाए। अदालत ने 27 दिसंबर के लिए अपने आदेशों की अनुपालना तलब की थी। विभाग ने याचिकाकर्ता को केवल 1,04,439 रुपये ही अदा किए थे।