राज्य सरकार ने हालांकि 9 जुलाई को 1331 व 1036 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए कदम उठाए हैं। जबकि उनके मुताबिक 14354 पद अभी तक रिक्त पड़े हैं। कोर्ट मित्र ने न्यायालय को यह भी बताया था कि शिक्षा सचिव न्यायालय को रिक्त पदों के बारे में स्पष्ट ब्यौरा देने में नाकाम रहे हैं।
उनके अनुसार शिक्षा विभाग की ओर से जो कदम उठाए गए हैं वह पर्याप्त नहीं है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप उठाए गए कदम नाकाफी है। पिछली सुनवाई के दौरान सचिव शिक्षा को शपथ पत्र के माध्यम से रिक्त पदों का स्पष्ट ब्यौरा देने को कहा था।
इसके अलावा प्रदेश उच्च न्यायालय ने कोर्ट मित्र द्वारा न्यायालय के समक्ष रखी दलीलों व कोर्ट में दायर नोट के दृष्टिगत शिक्षा सचिव को शपथ पत्र दाखिल करने के लिए एक अगस्त तक का समय दिया था। लेकिन उन्होंने इस बाबत अतिरिक्त समय देने के लिए हाईकोर्ट के समक्ष आवेदन दाखिल किया है। इस पर उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग को दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया है।
जेबीटी में ईटीटी को नियुक्ति कोर्ट के आदेशों पर निर्भर- प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जेबीटी पदों के खिलाफ जम्मू कश्मीर से ईटीटी (एलीमेंट्री टीचर ट्रेनिंग) का कोर्स करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति न्यायालय द्वारा पारित किए जाने वाले आदेशों पर निर्भर करेगी। मामले पर सुनवाई 29 अगस्त को होगी।
प्रदेश में अवैध खनन से जुड़े मामले में मुख्य सचिव, प्रधान सचिव सचिव उद्योग और भू - वैज्ञानिक वीरवार को हाईकोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान व न्यायाधीश सीबी बारोवालिया की खंडपीठ ने इन अधिकारियों से विचार विमर्श करने के पश्चात मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत शपथ पत्र दायर करने को कहा।
पिछली सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई थी कि प्रदेश में थोड़ी सी भूमि से खनिज पदार्थों को निकाला जा रहा है। जबकि न्यायालय के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार 44040 हेक्टेयर भूमि पर भरपूर मात्रा में खनिज उपलब्ध है और मात्र 2350 हेक्टेयर भूमि से खनिज निकालने की स्वीकृति प्रदान की गई है।
बाकि 42050 हेक्टेयर भूमि से खनिज पदार्थों का दोहन किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए ज्वाइंट इंस्पेक्शन कमेटी की ओर से भूमि लीज पर नही दी गई है। प्रदेश भू.वैज्ञानिक को मंगलवार को हाईकोर्ट के समक्ष इस बाबत स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया गया था।
न्यायालय ने राज्य भू वैज्ञानिक की ओर से दायर शपथ पत्र का अवलोकन करने के पश्चात यह पाया था कि प्रकृति के साथ होने वाले जटिल परिणामों के दृष्टिगत यह मुश्किल है कि वह अकेले इस कार्य को संभाल पाए।