हिमाचल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि छोटे और गरीब किसानों के 50 हजार रुपये तक के ऋण माफ करने के लिए योजना तैयार करे। कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय करे। मुख्य सचिव स्टेट लेबल फारमर्स कमीशन का गठन कर इसमें विशेषतर किसानों के प्रतिनिधियों को शामिल करें।
न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने यह भी आदेश दिए कि सरकार किसानों की हालत सुधारने के लिए स्वामी नाथन आयोग की बड़ी सिफारिशों को लागू करे। इस मामले की सुनवाई अब 13 जून को निर्धारित की गई है।
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि स्थायी नीति बनाकर काम किया होता तो किसानों को खेती छोड़कर इधर-उधर न भटकना पड़ता। कोर्ट ने दुख जताया कि हमें भरपेट खाना खिलाने वाले किसानों को नीतियों के अभाव के कारण आत्महत्या तक करने पर मजबूर होना पड़ता है।
कोर्ट ने ये भी कहा- किसानों को फसल बीमा योजना के तहत लाया जाए। यह काम छह माह के भीतर राष्ट्रीय बीमा कंपनियों से सुलह कर पूरा किया जाए। सभी जिलाधीशों को आदेश, सरकारी भूमि को गो सदनों के निर्माण के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों व स्थानीय नगर निकायों के नाम स्थानांतरित करने के लिए तीन माह के भीतर कारगर कदम उठाएं। इस मामले में कोर्ट के आदेशों की अनुपालना का दायित्व मुख्य सचिव को सौंपा।
पंचायतों को तीन महीने में दें पांच करोड़
हाईकोर्ट ने जनसंपर्क, शहरी विकास व पशुपालन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को आदेश दिए हैं कि वे मिलकर सभी नगर निकायों व ग्राम पंचायतों को 5 करोड़ रुपये की राशि तीन माह के भीतर जारी करें।
ताकि वे अपने क्षेत्रों में गो सदन का निर्माण कर सकें। कोर्ट ने खेद जताया कि सरकारों ने गरीब किसानों की फसलों को आवारा जानवरों व जंगली जानवरों से बचाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के आदेश
हाईकोर्ट ने कृषि उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के भी आदेश दिए। इन उत्पादों में धान, चावल, गेहूं, मक्की, जौ, रोंगी, कोदा, कनगून, बाजरा, अरहर, मसूर, उड़द, मूंग, मटर, लोभिया, दली दाल, चना और राजमा, बीजों में सरसों, तोरिया, अलसी, मूंगफली, तिल, तारामीरा, बिनौला और रई, फलों में आम, केला, लिची, माल्टा, निंबू, अंगूर, अनारदाना,
सेब, संतरा, आडू, पलम, नाशपाती, अमरूद, नियोजा, खुमानी, जापानी फल, तरबूज, अखरोट, बादाम, खरबूजा और पपीता, सब्जियों में आलू, प्याज, बैंगन, घीया, भिंडी, कद्दू, टमाटर, फूलगोभी, बंदगोभी, घीयातोरी, हरा मटर, फ्रांसबीन, साग, गाजर, मूली, शलगम, टिंडा, कटहल, जिमीकंद, अरबी, कचालू, हरी मेथी, बड़ी मिर्च, करेला, पेठा और खीरा, पशु उत्पाद में अंडा,
भेड़, बकरी, ऊन, मक्खन, घी, दूध, मीट और मछली, मसालों में अदरक, लहसुन, मिर्च, हल्दी, धनिया तथा अन्य कृषि उत्पादों में तंबाकू, कपास, गन्ना, गुड़, खंडसरी, दंदासा, धूप, गुच्छी, बनक्शा, कत्था, आंवला, कुंठ और इमारती लकड़ी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि समर्थन मूल्य लागत का आधे से अधिक तो होना ही चाहिए।