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अब सीबीआई करेगी चोरी हुए बेशकीमती घंटे की तलाश

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हिमाचल हाईकोर्ट ने शिमला स्थित इंडियन एडवांस्ड स्टडी संस्थान से चोरी हुए बेशकीमती धातु से बने दुर्लभ घंटे की जांच सीबीआई को सौंप दी है। यह घंटा 17 सिक्योरिटी गार्ड की निगरानी के बावजूद रहस्यमय ढंग से चोरी हो गया था। मजेदार बात यह है कि चोर 50 किलो की चौखट के साथ घंटे को ले गए और किसी को कानों कान खबर नहीं हुई। हैरत की बात यह भी है कि शिमला पुलिस और राज्य की जांच एजेंसियां पिछले पांच साल में इस चोरी का सुराग तक नहीं खोज सकी।
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मंगलवार को न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने सीबीआई को आदेश दिए कि इस मामले की गहनता से जांच कर तीन हफ्ते में रिपोर्ट दें। पुलिस जांच से असंतुष्ट संस्थान ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी कि इस मामले की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा जाए।

नेपाल के राजा ने वायसराय को तोहफे में दिया था ये घंटा

याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1903 में 30 किलो की दुर्लभ धातु से बना यह घंटा नेपाल के राजा ने तत्कालीन वायसराय को तोहफे में दिया था। लकड़ी की फ्रेम में जड़ा यह घंटा संस्थान के मुख्य द्वार पर लटकाया गया था। 21 अप्रैल 2010 की रात यह घंटा चोरी हो गया।
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पुलिस थाना बालूगंज में रिपोर्ट दर्ज की गई। चोरी का सुराग लगाने में नाकाम रही पुलिस ने 7 दिसंबर 2013 को न्यायिक दंडाधिकारी शिमला की अदालत में मामला बंद करने के लिए आवेदन किया। इसका संस्थान ने विरोध किया और मामले की दोबारा जांच करवाने की गुहार लगाई थी।

लकड़ी की चौखट समेत घंटे को उखाड़ ले गए

30 किलो का यह घंटा अष्टधातु का है। 1903 में तत्कालीन नेपाल नरेश राजा रत्न बहादुर सिंह ने यह गिफ्ट दिया था। यह घंटा मुख्यद्वार से कुछ कदम दूर रिसेप्शन के सामने बरामदे में लगा रखा था। घंटे तक पहुंचने के लिए चोरों ने एक दरवाजा पार किया।

यह घंटा छत में लकड़ी की चौखट में लगा हुआ था। चोर लकड़ी की चौखट समेत घंटे को उखाड़ ले गए। पुलिस का अनुमान था कि इस चौखट का वजन 50 किलो से अधिक रहा होगा। ऐसी स्थिति में कुल भार करीब 80 किलो आंका गया।
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रहस्यमय चोरी जिसका अब तक कोई सुराग नहीं

कड़ी सुरक्षा के बीच एक ऐतिहासिक धरोहर का चोरी होना किसी के गले से नहीं उतरा। उच्च अध्ययन संस्थान में कई ऐतिहासिक धरोहर मौजूद हैं। इनकी सुरक्षा के लिए घटना के समय 17 सिक्योरिटी गार्ड तैनात थे। चोरी वाली रात चौकीदार समेत सात कर्मचारियों की नाइट ड्यूटी थी। इनमें से एक चौकीदार नदारद था। सुरक्षा के लिहाज से संस्थान परिसर में पूरी रात बिजली की व्यवस्था रहती है और कर्मचारी गश्त करते हैं। परिसर में चारों ओर कृत्रिम रोशनी है लेकिन सिक्योरिटी गार्ड उसमें भी चोरों को नहीं देख पाए। हालांकि बाद में यह भी कहा गया कि केवल एक ही चौकीदार था।

करोड़ों में थी कीमत- ऐसा दावा किया जाता है कि इंटरनेशनल मार्केट में इसकी मुंहमांगी कीमत दी जाती है। इस घंटा की चोरी होने का मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि चोरों को लगा कि अष्टधातु के साथ साथ यह घंटी राइस पुलिंग है। इसी वजह से यह गायब की गई। हालांकि इस बात का सिर्फ अंदेशा जताया गया । राइस पुलिंग ऐसी धातु होती है जो चावल को अपनी ओर आकर्षित करती है।
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