फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल हाईकोर्ट का आदेश: डीए की पांच लंबित किस्तों और एरियर पर छह सप्ताह में फैसला ले सरकार

Fri, 30 Oct 2026 05:54 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हाईकोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और इसके एरियर के भुगतान से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। 
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और इसके एरियर के भुगतान से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कर्मचारियों के लंबित प्रतिवेदनों पर कानून के दायरे में रहकर डीए एरियर और 5 लंबित किस्तों के भुगतान पर 6 छह सप्ताह के भीतर निर्णय लें। एरियर का भुगतान न होने पर याचिकाकर्ता सुनीता देवी, पूजा रानी गौतम, हिमांशु शर्मा, संजीव कुमार और कांता देवी सहित अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग रिट याचिकाएं दायर की थीं।

विज्ञापन
Trending Videos

याचिकाकर्ताओं ने दी थी ये दलील
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि सरकार की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापनों 2 मार्च 2024, 16 अक्तूबर 2024 और 15 अक्तूबर 2025 के तहत उन्हें 1 जुलाई 2022 से डीए एरियर देय था, जो अब तक जारी नहीं किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने हालिया अधिसूचनाओं (10 अक्तूबर 2024 और 3 फरवरी 2026) का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य के एक अन्य विशिष्ट वर्ग के कर्मचारियों को केंद्रीय दरों पर डीए का लाभ दे दिया गया है, जबकि उनके साथ ऐसा नहीं किया गया। इन सभी मांगों को लेकर सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष पहले ही प्रतिवेदन दिया जा चुका था, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।
विज्ञापन

हाईकोर्ट ने आदेश में ये कहा
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के गुण-दोष पर गहराई से विचार किए बिना सभी रिट याचिकाओं को निपटान करते हुए सरकार सहित सक्षम प्राधिकारी को आदेश की तिथि से 6 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर विचार कर नियमानुसार फैसला लेने को कहा है। यदि जांच में डीए और पांचों किस्तों का एरियर याचिकाकर्ताओं के लिए देय पाया जाता है, तो तयशुदा 6 हफ्तों के भीतर ही उस राशि का भुगतान भी कर दिया जाए। इसके अलावा प्राधिकारी की ओर से लिए गए अंतिम निर्णय की जानकारी तुरंत याचिकाकर्ताओं को भी दी जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं का दावा सही पाया जाता है, तो निर्धारित समयसीमा के भीतर ही बकाया राशि का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें