याचिकाकर्ताओं ने दी थी ये दलील
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि सरकार की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापनों 2 मार्च 2024, 16 अक्तूबर 2024 और 15 अक्तूबर 2025 के तहत उन्हें 1 जुलाई 2022 से डीए एरियर देय था, जो अब तक जारी नहीं किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने हालिया अधिसूचनाओं (10 अक्तूबर 2024 और 3 फरवरी 2026) का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य के एक अन्य विशिष्ट वर्ग के कर्मचारियों को केंद्रीय दरों पर डीए का लाभ दे दिया गया है, जबकि उनके साथ ऐसा नहीं किया गया। इन सभी मांगों को लेकर सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष पहले ही प्रतिवेदन दिया जा चुका था, जिस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।
हाईकोर्ट ने आदेश में ये कहा
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के गुण-दोष पर गहराई से विचार किए बिना सभी रिट याचिकाओं को निपटान करते हुए सरकार सहित सक्षम प्राधिकारी को आदेश की तिथि से 6 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर विचार कर नियमानुसार फैसला लेने को कहा है। यदि जांच में डीए और पांचों किस्तों का एरियर याचिकाकर्ताओं के लिए देय पाया जाता है, तो तयशुदा 6 हफ्तों के भीतर ही उस राशि का भुगतान भी कर दिया जाए। इसके अलावा प्राधिकारी की ओर से लिए गए अंतिम निर्णय की जानकारी तुरंत याचिकाकर्ताओं को भी दी जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ताओं का दावा सही पाया जाता है, तो निर्धारित समयसीमा के भीतर ही बकाया राशि का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए।