हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को शिमला के हीरानगर स्थित बाल सुधार गृह में बच्चों को यातनाएं देने के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने इस मामले में सरकार सहित अन्य को चार सप्ताह में जवाब दायर करने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की खंडपीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई की। मानवाधिकार संरक्षण के लिए कार्यरत उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। उच्च न्यायालय ने पत्र को आपराधिक जनहित याचिका मानकर संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार के अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक और जिला कार्यक्रम अधिकारी व अन्यों को भी पार्टी बनाया है। इस मामले की अगली सुनवाई 24 जून को होगी।
उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष श्रीवास्तव ने कहा कि बाल सुधार गृह में बच्चों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता है। सोलन जिले के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने जो बच्चे हीरानगर सुधार गृह में भेजे हैं, उनमें से दो बच्चों ने बोर्ड के समक्ष लिखित शिकायत में ये आरोप लगाए हैं। बच्चों ने सुधार गृह में काम करने वाले अधिकारियों पर मारपीट करने के भी गंभीर आरोप हैं। उन्होंने शिकायत पत्र में कहा है कि बच्चों को ऐसी जगह पर मारा पीटा जाता है जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हैं। ये शिकायतें सोलन के जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के रिकॉर्ड में दर्ज की गई हैं। बता दें कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों को जो किसी अपराध में संलिप्त हैं व जिन पर ट्रायल चल रहा है वे इन सुधार गृह में रहते हैं।