हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोलन जिले के बद्दी में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता से कम दोहन किए जाने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष सहित जिलाधीश सोलन, एसडीएम नालागढ़, सीईओ बद्दी- बरोटीवाला-नालागढ़ विकास प्राधिकरण, प्रतिनिधि बीबीएन उद्योग संघ और सीईओ बद्दी इनफ्रास्ट्रक्चर बद्दी टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट को तलब किया है। मामले पर सुनवाई 5 अक्तूबर को होगी।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के इस वक्तव्य के बाद दिया कि बद्दी में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट बना दिया गया है, लेकिन उद्योगों ने कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं किया। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि वह शपथ पत्र के माध्यम से बताये कि कितने उद्योगों ने प्रदूषण नियंत्रण के समक्ष कनेक्शन के लिए आवेदन किया है।
मामले के अनुसार सोलन जिला के बद्दी में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी का सही से उपचार न होने के कारण बद्दी क्षेत्र में प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ रही है। करीब 60 करोड़ की लागत से इस क्षेत्र में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया है। इसकी प्रस्तावित क्षमता 250 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का उपचार करने की है जबकि इसमें 110 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का ही उपचार किया जा रहा है।
ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता से कम दोहन किये जाने की बात तब सामने आई जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने यह बात जिला परिषद की त्रैमासिक बैठक में बताई थी। सोलन जिला परिषद अध्यक्ष धर्मपाल चौहान ने बोर्ड के अधिकारियों से मीटिंग के दौरान पूछा था कि बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ क्षेत्र में कितने कचरा उपचार केंद्र खोले गए हैं और क्या वे क्षमता के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी पूछा था कि क्या बोर्ड ने कभी ट्रक ऑपरेटर यूनियन के पास सरसा नदी से पानी के सैंपल जांच के लिए लिए और यदि लिए तथा सैंपल फेल पाये गए तो बोर्ड ने नजदीकी औद्योगिक इकाइयों पर क्या कार्यवाई अमल में लाई। आरोप लगाया है कि क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोत औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी से प्रदूषित हो रहे हैं जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।