हाईकोर्ट ने दिव्यांगों के लिए हिम बस कार्ड के सालाना रिन्यूअल की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने सक्षम अधिकारियों से कहा है कि वे इस बात की समीक्षा करें कि क्या इस कार्ड को सालाना रिन्यू करने के बजाय एक बार में पांच साल की अवधि के लिए जारी किया जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश शोभू राम गर्ग की ओर से दायर जनहित याचिका में दिया है। कोर्ट ने अधिकारियों को यह जांचने के निर्देश दिए हैं कि क्या सालाना रिन्यूअल फीस और प्रक्रिया को बदलकर इसे 5 साल के लिए वैध बनाया जा सकता है या फिर इसे प्रमाण पत्र की वैधता जितने समय के लिए ही बिना रिन्यूअल के लागू रखा जा सकता है। अदालत ने इस मामले को सुनवाई के लिए 23 नवंबर को रखा है।
ट्रैक्टर पर चालक के अलावा अन्य व्यक्ति अनधिकृत यात्री
शिमला। हाईकोर्ट ने मोटर दुर्घटना से जुड़े एक मामले में स्पष्ट किया है कि ट्रैक्टर पर चालक के अलावा किसी भी अन्य व्यक्ति का यात्रा करना बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। अदालत ने फैसले में कहा कि ट्रैक्टर पर सवारी करने वाला व्यक्ति अनधिकृत या निःशुल्क यात्री माना जाएगा। देनदारी वाहन मालिक एवं चालक की होगी। निर्णय न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की अदालत ने सुनाया।