कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने वन विभाग की नाकामी पर तल्ख टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने खेद जताया कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में नाकाम रहे हैं।
आदेशों के बावजूद वन भूमि का संरक्षण नहीं कर रहे हैं। बड़े-बड़े चोरों पर हाथ नहीं डाला जा रहा है। आदेशों की अनुपालना न होना दर्शाता है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था चौपट हो गई है।
कोर्ट ने अवैध कब्जाधारियों से वन भूमि को छुड़ाने की मुहिम व छुड़ाई गई भूमि की विस्तृत जानकारी वेब पोर्टल सहित अन्य प्रचार के माध्यम से जनता तक पहुंचाने के आदेश भी दिए हैं।
लेकिन वन विभाग केवल उन लोगों पर कार्रवाई करने लगा जिन्होंने खुद हाईकोर्ट में हलफनामे दायर कर अतिरिक्त कब्जाई हुई भूमि छोड़ने का फैसला लिया। वन विभाग उन अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ मौन है, जो चुपचाप अवैध कब्जे कर बैठे हैं।
अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अपने खिलाफ कोई करवाई नहीं होने दे रहे। कोर्ट का मानना है कि यदि ऐसी बड़ी मछलियों पर सबसे पहले हाथ डाला जाए तो छोटे कब्जाधारी खुद ब खुद कब्जे छोड़ देंगे। वन विभाग के अधिकारी ऐसी बड़ी कार्रवाइयां अमल में लाने में पूरी तरह से फेल हो चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि कोर्ट ने अभी 43 वन सब डिविजन के 3-3 सबसे बड़े कब्जाधारियों की जानकारी मांगी है जबकि प्रदेश में 3282 पंचायतों के बड़े बड़े कब्जाधारियों की जानकारी कभी भी कोर्ट द्वारा मांगी जा सकती है।