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हिमाचल: हाईकोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में इम्यूनो हेमेटोलॉजी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग स्थापित करने के दिए निर्देश

Fri, 20 Jun 2025 01:19 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला

सार

उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इम्यूनो हेमेटोलॉजी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग स्थापित करें, जहां अभी तक यह सुविधा नहीं है। 
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल उच्च न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इम्यूनो हेमेटोलॉजी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग स्थापित करें, जहां अभी तक यह सुविधा नहीं है। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने डॉ. ऋचा गुप्ता की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। अदालत ने छह महीने के भीतर इन विभागों को स्थापित करने का समय दिया है। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए टिप्पणी की कि यह विभाग चिकित्सा शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। न्यायालय ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के 2021 के दिशा-निर्देशों का उल्लेख किया। इसमें ब्लड बैंक के नामकरण को बदलकर इम्यूनो हेमेटोलॉजी और ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग करने की आवश्यकता पर वल दिया गया है।

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अदालत में कहा गया कि विशेष सचिव (स्वास्थ्य) ने 30 अक्तूबर 2024 को मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक को मंडी, हमीरपुर और चंबा के मेडिकल कॉलेजों में इस विभाग के सृजन के संबंध में एक प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा था। इसके जवाब में लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज ने 11 मार्च, 2025 को सूचित किया कि एनएमसी दिशा निर्देशों के अनुसार नामकरण बदलना और एक असिस्टेंट प्रोफेसर का पद बनाना आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने मेडिकल कॉलेज नाहन में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर पदोन्नति की मांग की थी।

हालांकि, न्यायालय ने पूर्व निर्णय का हवाला देते हुए उनकी पदोन्नति की मांग को अस्वीकार कर दिया, जिसमें पदोन्नत और सीधी भर्ती वाले उम्मीदवारों के बीच 50 फीसदी के आरक्षण कोटा को बनाए रखने पर जोर दिया गया था। न्यायालय ने यह भी ध्यान दिया कि विशेष सचिव (स्वास्थ्य), हिमाचल प्रदेश सरकार ने 30 अक्तूबर 2024 को ही मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशक को मंडी, हमीरपुर और चंबा के मेडिकल कॉलेजों में इस विभाग के सृजन के लिए एक समेकित प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए कहा था। प्रिंसिपल लाल बहादुर शास्त्री गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, मंडी ने 11 मार्च को निदेशक को सूचित किया था कि एनएमसी दिशा निर्देशों के अनुसार यह नामकरण परिवर्तन व एक असिस्टेंट प्रोफेसर का पद सृजित करना आवश्यक है। 

बॉन्ड राशि जमा कर डॉक्टर को सुपर स्पेशियलिटी कोर्स की मिली अनुमति
 हाईकोर्ट ने बॉन्ड राशि जमा कर सुपर स्पेशियलिटी कोर्स करने की डॉक्टर को अनुमति दे दी है। अदालत ने प्रतिवादियों को एनओसी और मूल एमबीबीएस डिग्री जारी करने का निर्देश दिया। शर्त यह है कि याचिकाकर्ता निर्धारित समयसीमा के भीतर बॉन्ड राशि जमा करे। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी विभाग में सेवा करने का इच्छुक नहीं है, तो उसे ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। खासकर जब वह बॉन्ड राशि जमा करने को तैयार हो। अदालत ने याचिकाकर्ता के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया, जिसमें उन्होंने कहा है कि एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मिलने पर वह एक सप्ताह के भीतर 40 लाख रुपये जमा करेगे। उन्होंने कहा कि सुपर स्पेशियलिटी कोर्स पूरा करने के बाद संबंधित संस्थान से पांच साल के लिए हिमाचल प्रदेश में सुपर स्पेशलिस्ट के रूप में अपनी सेवा देने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि अगर वह ऐसा करने में विफल रहे, तो उपरोक्त बॉन्ड राशि को प्रतिवादी-राज्य की ओर से जब्त किया जा सकता है। याचिकाकर्ता डॉक्टर वर्तमान में चंबा मेडिकल कॉलेज में ट्यूटर स्पेशलिस्ट, सीनियर रेजिडेंट (रेडियोथेरेपी) हैं।
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उन्होंने डीएनबी (डिप्लोमेट ऑफ नेशनल बोर्ड) सुपर स्पेशियलिटी कोर्स के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र न दिए जाने को अदालत में चुनौती दी थी। याची ने वर्ष 2016 में मेडिकल ऑफिसर के रूप में सेवा शुरू की थी और 2020 में आईजीएमसी शिमला से रेडियोथैरेपी में पीजी कोर्स पूरा किया था। पीजी कोर्स में प्रवेश के समय उन्होंने चार साल की अनिवार्य सेवा पूरी करने के लिए एक बॉन्ड भरा था और अपनी एमबीबीएस डिग्री व 40 लाख रुपये के बिना तिथि वाले चेक जमा किए थे। जनवरी 2024 में पीजी कोर्स पूरा करने के बाद उन्होंने सुपर स्पेशियलिटी परीक्षा उत्तीर्ण की और 20 मई को उन्हें डीएनबी एसएस मेडिकल ऑन्कोलॉजी में अखिल भारतीय कोटे की सीट आवंटित हुई है। वहीं राज्य सरकार ने एनओसी देने से इन्कार करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता ने अनिवार्य एक वर्ष की फील्ड पोस्टिंग पूरी नहीं की है और राज्य में डॉक्टरों की भारी कमी है। अदालत ने पीजी नीति के खंड 7.3.5 का उल्लेख किया, जिसमें नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों में सीनियर रेजिडेंसी को अनिवार्य फील्ड पोस्टिंग से छूट दी गई है।
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