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Himachal: 70 साल से अधिक आयु के बुजुर्गों को बकाया पेंशन एरियर देने के आदेश जारी

Fri, 20 Jun 2025 12:41 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

प्रदेश सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को बकाया पेंशन एरियर का 50 फीसदी भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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बकाया पेंशन एरियर देने के आदेश जारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश सरकार ने 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को बकाया पेंशन एरियर का 50 फीसदी भुगतान करने के आदेश दिए हैं। यह कुल पेंशन एरियर का 30 प्रतिशत होगा। ऐसे में पेंशनरों को अब बकाया पेंशन एरियर का करीब 70 फीसदी भुगतान हो जाएगा। एरियर इसी माह की पेंशन के साथ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट में इसकी घोषणा की थी। यह आदेश सरकारी पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को लेकर प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार की ओर से जारी किए गए हैं। 

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बकाया का भुगतान के लिए पेंशनरों ने दी आंदोलन की चेतावनी
वहीं, पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन ने कहा है कि अगर पेंशनरों के बकाया का भुगतान शीघ्र नहीं किया जाता है तो धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। सरकार विरोध के बाद भी राहत नहीं देती तो पेंशनर राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर न्याय की गुहार लगाएंगे। शिमला में  पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में पदाधिकारियों ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के मेडिकल बिल तक पास नहीं हो रहे। इसके कारण उनको परेशानी झेलनी पड़ रही है।

जिला अध्यक्ष भाग चंद चौहान और महासचिव भूपराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा सत्र के दौरान मंहगाई भत्ता देने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक इसकी किस्त जारी नहीं की है। सरकार के पास 13 फीसदी महगाई भत्ते की किस्त देय है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि मंहगाई भत्ते की किस्त जून के वेतन और पेंशन के साथ दी जाएगी लेकिन यह दुखद है कि मुख्यमंत्री अपनी ही घोषणा लागू नहीं कर पा रहे हैं।
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बैठक में 01.01.2016 से 01.01.2022 के बीच सेवानिवृत हुए कर्मचारी को उनके देय वित्तीय सेवानिवृत्ति लाभ ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट, काॅम्यूटेशन और छठे वेतन आयोग का बकाया अभी तक सरकार ने जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर संबंधित पेंशनर न्यायालय में भी याचिका दायर कर चुके हैं जिसमें फैसले के बाद भी सरकार वित्तीय सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दे रही। बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार उनको देय वित्तीय राशि का बकाया भुगतान शीघ्र नहीं करती है तो मजबूरन पेंशनरों को धरना प्रदर्शन करने पर विवश होना पड़ेगा। जरूरत पड़ी तो पेंशनर राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर न्याय की गुहार लगाएंगे।
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