हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को निर्दलीय विधायक आशीष शर्मा और पूर्व विधायक चैतन्य शर्मा के पिता व उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव राकेश शर्मा के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के मामले में तीन घंटे बहस चली। न्यायाधीश विपिन चंद नेगी ने मामले को सुना। सरकार की ओर से अभी बहस पूरी नहीं की गई। मंगलवार को फिर मामले में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय अदालत में पेश हुए। उन्होंने पुलिस की ओर से दोनों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 7 और 8 के तहत दर्ज मामले को गलत बताया। उन्होंने दलील दी कि राजनीतिक कारणों की वजह से सरकार ने इन पर एफआईआर दर्ज की गई है।
उन्होंने अदालत से मांग की कि जब तक मामला न्यायालय में लंबित है, तब तक पुलिस कार्रवाई रोक दी जाए। दूसरी ओर सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता अनूप रत्न ने कहा की राज्यसभा चुनाव में भारत के लोकतंत्र और सांविधानिक मूल्यों की हत्या हुई है। अदालत को बताया कि पुलिस ने राकेश शर्मा को दो नोटिस जारी किए थे। वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। बता दें कि पुलिस ने विधायक आशीष और पूर्व विधायक चैतन्य के पिता के खिलाफ बालूगंज थाने में राज्यसभा चुनाव के दौरान खरीद फरोख्त के आरोप में केस दर्ज किया है। केस दर्ज करने के खिलाफ दोनों हाईकोर्ट गए हैं।
अयोग्य विधायकों ने दायर की केस वापस लेने को याचिका
महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट में बताया कि छह अयोग्य विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट से केस वापस करने को लेकर याचिका दायर की है। बता दें कि छह अयोग्य विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने शीर्ष अदालत में विधानसभा अध्यक्ष के अयोग्य करार देने के फैसले को चुनौती दी है।