हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बागवानी विभाग में कार्यरत दैनिक वेतन भोगी की सेवाओं को आठ वर्ष के बाद नियमित करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि दैनिक वेतन भोगी को राज्य सरकार की वर्ष 2009 की नीति के तहत नियमित किया जाए। उसे वित्तीय लाभ भी दिए जाएं। जिला कांगड़ा निवासी विक्रम सिंह फल प्रसंस्करण एवं प्रशिक्षण केंद्र नूरपुर में वर्ष 2001 से दैनिक वेतन भोगी के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2016 में उसने प्रशासनिक प्राधिकरण के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि उसकी सेवाओं को नियमित किया जाए।
प्रशासनिक प्राधिकरण के बंद होने पर मामला प्रदेश हाईकोर्ट में स्थानांतरित किया गया। मामले पर सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष दलील दी गई कि याचिकाकर्ता वर्ष 2001 से दैनिक वेतन भोगी के पद पर कार्य कर रहा है। विभाग ने अभी तक उसकी सेवाएं नियमित नहीं की हैं। प्रतिवादियों की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता को सिर्फ घंटों के आधार पर ही नौकरी पर रखा गया है। ऐसे में वह नियमित सेवाओं का हकदार नहीं है। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता विभाग में घंटों के आधार पर नहीं बल्कि दैनिक वेतन भोगी के पद पर कार्य कर रहा है। वह अपनी सेवाओं को नियमित करने का हक रखता है।