हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मध्यस्थ (आर्बिट्रेटर) की ओर से पारित 95 करोड़ रुपये के अवार्ड (निर्णय) को रद्द कर दिया है। अदालत ने बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में यह फैसला दिया। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश माइक्रो एंड स्माल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल (एमएसएमईएफसी) को निर्देश दिया कि वह विवाद के निपटारे के लिए अपने पैनल से एक नया मध्यस्थ नियुक्त करे। अदालत ने मध्यस्थता प्रक्रियाओं में निष्पक्षता और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करने का भी निर्देश दिया है। दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। खरीदकर्ता ने मध्यस्थ की ओर से पारित 6 अप्रैल 2021 के निर्णय को चुनौती दी थी, जिसमें आपूर्तिकर्ता को 95,00,70,208 रुपये के साथ ब्याज व जीएसटी का भुगतान करने का निर्देश भी दिया गया था।