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लोगों को अब बीमारी के खर्च की चिंता नहीं सताएगी, सरकार ने शुरू की ये योजना

Tue, 16 Jan 2018 09:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पालमपुर (कांगड़ा)
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प्रदेश में अब लोगों को बीमारी के खर्चे की चिंता नहीं सताएगी। सरकार ने यूनिवर्सल हेल्थ योजना शुरू कर दी है। यह योजना पहले चरण में पांच लाख परिवारों के लिए होगी। इसके लिए हर आदमी को एक दिन का एक रुपया जमा करवाना होगा। 

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इसके लिए सरकार जल्द 100 मेडिकल अधिकारियों के पद भरेगी। पत्रकार वार्ता के दौरान स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने कहा कि पहले योजना का पंजीकरण जिला स्तर पर होता था, लेकिन जल्द इसे उपमंडल स्तर पर लागू किया जा रहा है।

योजना में शामिल किए जाएंगे पांच लाख परिवार

योजना में पांच लाख परिवार शामिल किए जाएंगे। इसमें एक रुपये प्रतिदिन के हिसाब से साल में 365 रुपये जमा करवाने होंगे। वर्ष 2022 तक प्रदेश टीबी रोग से मुक्त हो जाएगा। इसके लिए सरकार ने एक्टिव केस फाइडिंग (एसीएफ) योजना शुरू की है। 

पालमपुर में योजना का शुभारंभ स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार ने किया। इसे 15 जनवरी से बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों से शुरू किया गया है। योजना के तहत घर-घर जाकर टीबी के मरीजों का पता लगाया जाएगा। इसमें प्रवासी बस्तियां मुख्य रूप से चिह्नित की जाएंगी। 

उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने प्रदेश में मेडिकल कॉलेज तो चला दिए हैं, लेकिन इनमें स्टाफ की भारी कमी है। इसे जल्द पूरा किया जाएगा। मदर चाइल्ड यूनिट नौ स्थानों पर शुरू होंगे। इसके तहत टांडा मेडिकल कॉलेज में 40 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। 

पालमपुर और नूरपुर में लगेगी सीबी नॉट मशीन 

इस दौरान जिला भाजपा अध्यक्ष विनय शर्मा, विधायक मुल्खराज प्रेमी, विधायक रवि धीमान, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता हिमांशु मिश्रा और मंडल अध्यक्ष संजीव सोनी आदि मौजूद रहे।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि जिला कांगड़ा में पालमपुर और नूरपुर अस्पतालों में सीबी नॉट मशीन लगाएगी जाएगी। इससे टीबी के मरीजों का पता जल्द लगाया जा सकेगा। मशीन दो घंटे के अंदर टीबी के मरीजों का पता लगाएगी। इससे टेस्ट के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 
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पेंशन सुविधा के लिए  मंत्री परमार से गुहार

पेंशन सुविधा के लिए वन विकास निगम का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधान वन विकास मंडल धर्मशाला सुनील शास्त्री की अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार से पालमपुर में मिला। प्रधान सुनील ने कहा कि जो पेंशन वन विकास मंडल के कर्मचारियों को मिल रही है वह गुजारे के लायक नहीं है।

तात्कालिक भाजपा सरकार ने 1999 में एक अधिसूचना जारी की थी। इसके मुताबिक सभी बोर्ड और निगम के कर्मचारियों को सरकार की ओर से पेंशन दी जाएगी। लेकिन, यह अधिसूचना लागू नहीं हो सकी। 2004 में प्रदेश में आई कांग्रेस सरकार ने इस अधिसूचना को वापस ले लिया।

इसके तहत 1999 से लेकर दो दिसंबर 2004 के बीच रिटायर हुए कर्मचारियों को यह सुविधा सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई लेकिन, अन्य बचे कर्मचारी इस सुविधा से वंचित हैं।

स्वास्थ्य मंत्री परमार से आग्रह किया है कि वन विकास निगम कर्मचारियों की पेंशन सुविधा को लेकर अधिसूचना जारी की जाए। इस समय करीब 550 करोड़ की राशि भविष्य निधि के खाते में जमा है। इस राशि को सरकार के खाते में जमा करवा दिया जाए, तो अगले दस सालों तक पेंशन दी जा सकती है।
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