आठ माह से स्पाइन अस्पताल में चल रहा इलाज
करीब 5 महीने तक टांडा मेडिकल काॅलेज में इलाज के दौरान कोई सुधार नहीं होने के चलते अब 8 माह से उसका चंडीगढ़ के स्पाइन अस्पताल में इलाज चल रहा है। वहां हर माह 60 हजार रुपये से ज्यादा का खर्च करना परिवार के लिए मुश्किल हो रहा है। विडंबना यह है कि सरकारी स्कूल के टूर्नामेंट में चोटिल हुए छात्र की आज तक सरकार और शिक्षा विभाग ने सुध तक नहीं ली। इकलौते पोते को इंसाफ दिलाने के लिए सारी जमा पूंजी लुटाने के बाद बुजुर्ग दादा पुन्नू राम नेताओं से लेकर अफसरों तक के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो पाया।
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सरकार और विभाग ने सुध तक नहीं ली
स्कूल स्टाफ की तरफ से हादसे के वक्त थोड़ी आर्थिक मदद मिली, लेकिन परिवार को इस बात का मलाल है कि गौतम की सरकार और विभाग ने सुध तक नहीं ली। चिकित्सकों ने गौतम के लिए स्पेशलाइज्ड व्हील चेयर की अनुशंसा की है, जिसकी कीमत लगभग डेढ़ लाख रुपये है। लेकिन गौतम का परिवार पहले से ही चंडीगढ़ में महंगे इलाज के खर्च के बोझ से दबा हुआ है। गौतम के दादा पुन्नू राम के मुताबिक सरकारी सिस्टम की लाचारी ने आज उन्हें भिखारी बना दिया है। इधर, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भड़वार की कार्यवाहक प्रिंसिपल वेणु बाला ने कहा कि यह मामला उनके ज्वाइन करने से पहले का है और जहां तक उनके ध्यान में है तो स्कूल स्टाफ ने आपसी सहयोग से परिवार की थोड़ी मदद की थी। संवाद
बहन को छोड़नी पड़ी पढ़ाई
गौतम के पिता राजेंद्र जरियाल एचआरटीसी में चालक हैं, जो खुद मधुमेह के रोगी हैं। गौतम की बड़ी बहन सुषमा अपनी स्नातकोत्तर डिग्री की हिमाचल प्रदेश विवि की सीट छोड़कर अपनी मां के साथ चंडीगढ़ में गौतम की देखभाल कर रही हैं। गौतम की दूसरी बहन को भी घर में बीमार पिता और बुजुर्ग दादा के लिए पढ़ाई छोड़कर वापस आना पड़ा। इसके बावजूद बिना सरकारी मदद के गौतम के महंगे इलाज ने परिवार की कमर तोड़ दी है।
मामला ध्यान में है और गौतम के दादा पुन्नू राम को अपनी तरफ से हरसंभव सहयोग के लिए आश्वस्त किया है। यह मसला सरकार के समक्ष भी उठाया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे या परिवार को ऐसी यातना से न गुजरना पड़े। इस मामले से शिक्षा व खेल विभाग को भी सबक लेकर कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।- रणवीर सिंह निक्का, विधायक नूरपुर