जीएसटी लागू होने के बाद भी चल रही कर चोरी पर लगाम कसने के लिए कर एवं आबकारी विभाग अब कर्नाटक में प्रयोग किए जा रहे सॉफ्टवेयर की मदद लेगा। विभाग ने सॉफ्टवेयर को हिमाचल में प्रयोग करने के लिए कर्नाटक एनआईसी से संपर्क साधा है। विभाग का दावा है कि सॉफ्टवेयर के लागू होने के बाद प्रदेश में ई वे बिल और स्टेट जीएसटी रिटर्न में अंतर खत्म हो जाएगा और कर चोरी रुकने से प्रदेश का राजस्व बढ़ेगा।
पिछले साल राज्य में जीएसटी लागू होने के बाद प्रदेश को उम्मीद थी कि कर चोरी पर लगाम लग जाएगी। शुरू में विभाग को भी जीएसटी समझने और लागू करने में दिक्कतें आई लेकिन धीरे धीरे जब जीएसटी पर अधिकारियों की पकड़ मजबूत हुई तो कर चोरी के मामले सामने आने लगे।
आला अधिकारियों का मानना था कि चूंकि मानवीय तरीके से सभी रिटर्न देखना और उनकी पड़ताल करना संभव नहीं है। ऐसे में कर चोरी पर पूरी तरह नकेल कसने में दिक्कत आ रही थी। इसी के बाद विभाग देशभर में कर चोरी रोकने के लिए अन्य राज्यों में इस्तेमाल हो रही प्रक्रियाओं का अध्ययन कर रहे थे।
प्रमुख सचिव राज्य कर एवं आबकारी जेसी शर्मा ने बताया कि कर्नाटक एनआईसी ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है जिसमें ई वे बिल और जीएसटी के रिकार्ड का अपने आप मिलान हो जाता है।
इससे दोनों के अलग अलग होने की वजह से हो रही कर चोरी की संभावना शून्य हो जाएगी। बताया कि कर्नाटक एनआईसी से हिमाचल एनआईसी के जरिये संपर्क कर हिमाचल में इस साफ्टवेयर को जल्द शुरू करने की कोशिश की जा रही है।