कुल संभावित लागत का 75 फीसदी खर्च लाभार्थी या लाभार्थियों को देना होगा। बाकी 25 प्रतिशत खर्च खुद विभाग की ओर से उठाया जाएगा। उन क्षेत्रों का प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें पेयजल का काफी संकट है।
जहां पानी सेचुरेशन स्तर तक पहुंचा हुआ है, वहां हैंडपंप नहीं लगेंगे। जिन आबादियों को दो साल पहले ही सड़कें मिली हैं, उन्हें भी प्राथमिकता ही दी जाएगी। जहां अनलाइड ड्रेंस, लैटरिन पिट्स और बड़े पेड़ों के निकट हैंडपंप नहीं लगेंगे। न ही ये सेप्टिक टैंक, बिजली की लाइनों से नीचे नहीं लगेंगे।
यह भी देखना होगा कि उस क्षेत्र में बाढ़ आने की आशंका न हो। भूमि सभी विवादों से रहित होनी चाहिए। अगर इसे संयुक्त खातेदार हों तो अन्य स्टेक होल्डरों के भी एफिडेविट पर एनओसी लेने होंगे।