भूमि सुधार कानूनों के कारण जिन मंदिरों की संपत्ति मुजारों या सरकार के पास चली गई थी, सरकार ऐसे मंदिर संचालकों को आर्थिक मदद देने जा रही है। इससे इन मंदिरों का रखरखाव और पूजा-अर्चना का कार्य ठीक से हो पाएगा। इसको लेकर सरकार मंदिरों को अनुदान देने जा रही है। ऐसे मंदिरों की समितियां या कारदारों को सरकार से अनुदान के लिए आवेदन करना होगा। जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने कहा कि पात्र मंदिर वार्षिक अनुदान भी ले सकते हैं। इस पैसे से मंदिरों में पूजा-अर्चना और रखरखाव के अलावा सीसीटीवी कैमरे आदि लगवाए जा सकते हैं।
इसके अतिरिक्त एक मुश्त अनुदान लेकर मंदिर परिसर में आय का साधन बढ़ाने के लिए सराय, दुकान या अन्य परिसंपत्तियों का निर्माण करवाया जा सकता है। इच्छुक मंदिर कमेटियां जिला भाषा अधिकारी कार्यालय से आवेदन पत्र ले सकती हैं। गुलेरिया ने कहा कि प्रदेश में मंदिरों की समृद्ध विरासत है। सरकार ने भाषा एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से सांस्कृतिक विरासतों के संवर्द्धन और संरक्षण के लिए कई योजनाओं का संचालन किया है। पहले प्रदेश के बहुत से मंदिरों की अपनी भू संपदा थी, जिससे प्राप्त आय का उपयोग मंदिरों के रख-रखाव और दैनिक पूजा-अर्चना की जाती थी। अब इसमें समस्या का सामना करना पड़ रहा था।