मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे हिमाचल को रेणुका ठाकुर की उपलब्धि पर गर्व है। उन्होंने प्रदेश के साथ पूरे देश का नाम रोशन किया है। सीएम ने रेणुका से कहा कि उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन और समर्पण से प्रदेश व देश की बेटियां अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरित होंगी। कहा, रेणुका ने वह सपना पूरा कर दिखाया, जो हर पहाड़ की बेटी देखती है। रेणुका ने दिखाया कि जुनून और विश्वास से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। सीएम ने कहा कि रेणुका के स्वर्गीय पिता को नमन, जिनकी प्रेरणा आज पूरे हिमाचल का अभिमान बनी हैं। मुख्यमंत्री ने रेणुका ठाकुर की माता को भी बधाई दी।
10 नंबर की जर्सी वाले ये हैं महान खिलाड़ी
- 10 नंबर की जर्सी पहनती हैं रेणुका
- सचिन तेंदुलकर : (भारत) उनके सम्मान में भारत में यह नंबर रिटायर कर दिया।
- लसिथ मलिंगा (श्रीलंका) अपने स्लिंगिंग एक्शन और घातक यॉर्कर्स के लिए प्रसिद्ध
- कुमार संगकारा (श्रीलंका) कुछ टूर्नामेंटों में उन्होंने भी 10 नंबर की जर्सी पहनी थी।
- शाकिब अल हसन : (बांग्लादेश)- विश्व के शीर्ष ऑलराउंडरों में से एक।
रेणुका का गेंदबाजी कॅरिअर
टेस्ट वनडे टी-20
मैच 3 27 54
पारी 6 26 53
विकेट 2 41 58
औसत 90 25 21
स्ट्राइक रेट 150 30 20
प्रदेश को रेणुका पर गर्व : प्रतिभा
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम को विश्व विजेता बनने पर बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि महिला क्रिकेट टीम ने साबित कर दिया है कि महिलाएं पुरुषों के मुकाबले में कहीं भी कम नही हैं। प्रतिभा सिंह ने टीम में रोहड़ू की बेटी रेणुका ठाकुर को भी जीत की बधाई देते हुए कहा है कि प्रदेश को रेणुका ठाकुर पर गर्व है। उन्होंने कहा है कि क्रिकेट जगत में प्रदेश की बेटी का नाम प्रदेश की सभी बेटियों को गौरवमयी करता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लिए यह बहुत ही गौरव की बात है कि रेणुका ठाकुर विश्व कप विजेता के तौर पर टीम का हिस्सा बनीं।
बचपन में लड़कों के साथ कपड़े की गेंदों से खेलती थी क्रिकेट: मां
रेणुका सिंह ठाकुर को बचपन में क्रिकेट का बहुत शौक था और वह अपने मोहल्ले के लड़कों के साथ घर में बने लकड़ी के बल्ले और कपड़े की गेंदों से खेलती थीं। रेणुका की मां सुनीता ने यह भी बताया कि उनके दिवंगत पति क्रिकेट प्रेमी थे और चाहते थे कि रेणुका इस खेल में अच्छा प्रदर्शन करे। सुनीता ने सोमवार को कहा, 'मेरे पति क्रिकेट के बहुत बड़े प्रशंसक थे और चाहते थे कि बच्चों में से कोई एक खेल या कबड्डी चुने और भले ही वह हमारे साथ नहीं हैं, मेरी बेटी ने उनके सपने पूरे किए हैं।' रेणुका को हमेशा से क्रिकेट का शौक था और वह बचपन से ही लड़कों के साथ यह खेल खेलती थी। छोटी बच्ची के रूप में, वह सड़क किनारे कपड़े की गेंद बनाकर लकड़ी के बल्ले से खेला करती थी। रेणुका के पिता केहर सिंह ठाकुर, जो राज्य के सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थे, का निधन तब हुआ जब वह मात्र तीन वर्ष की थीं। वह अपने शरीर पर बने पिता के टैटू से खेलती थीं।