सर्दियों के दौरान जनजातीय क्षेत्रों के लिए होने वाली आपातकालीन उड़ानों का खर्चा प्रदेश सरकार वहन करेगी। उड़ानों का खर्च अब जनजातीय फंड से नहीं कटेगा। पूर्व कांग्रेस सरकार ने 2014 से यह खर्च ट्राइबल फंड से काटना शुरू किया था।
लेकिन अब दोबारा सरकार ने चौपर का खर्चा खुद वहन करने का निर्णय लिया है। जनजातीय क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान हेलीकॉप्टर रेस्क्यू का एकमात्र जरिया रहता है। पूर्व में करीब 12.50 करोड़ रुपये जनजातीय फंड से हेलीकॉप्टर उड़ान के काट लिए जाते थे।
सरकार ने जनजातीय क्षेत्रों के लिए नियमित उड़ानें करने का भी फैसला लिया है। सर्दियों के दौरान रोहतांग टनल को भी लाहौल घाटी के लिए विकल्प के तौर पर खुला रहेगा। करीब छह माह तक बर्फ के आगोश में रहने वाली लाहौल-स्पीति और पांगी घाटी का शेष विश्व से संपर्क कट जाता है। दोनों जगहों में आपातकाल में आवाजाही का जरिया एकमात्र हेलीकॉप्टर रहता है।