सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया तो उन्होंने वीआरएस को भी अरजी दे दी। इसके बावजूद सरकार ने उन्हें रिलीव नहीं किया। अब उनकी पुरानी नियुक्ति खारिज कर नई अधिसूचना जारी कर दी गई है।
सुरेंद्र ठाकुर अर्की से भाजपा के टिकट के दावेदार भी रह चुके हैं। वह भारतीय मजदूर संघ से भी लंबे समय तक जुडे़ रहे हैं। कुछ कर्मचारी नेता उनके खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। उनके धूमल सरकार में सक्रिय रहने और भाजपा के दूसरे खेमे से जुड़े होने की शिकायत करते रहे।
इसी गहमागहमी के बीच उन्हें सरकार ने पीडब्ल्यूडी से रिलीव नहीं किया। सुरेंद्र ठाकुर ने अपनी नियुक्ति के खारिज होने के बाद नई अधिसूचना जारी होने की बात मानी, मगर इस पर खुलकर अपनी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।