हिमाचल में प्राकृतिक आपदाओं पर बचाव दल को जल्द पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने कवायद तेज कर दी है। एनडीआरएफ की बटालियन स्थापित करने के लिए जमीन का पेच फंसा हुआ है, जिसे दूर करने के लिए जमीन फाइनल की जा रही है। दरअसल, सोलन हादसे के बाद राज्य सरकार सतर्क हो गई है।
मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने कहा कि सरकार एनडीआरएफ बटालियन के रिस्पांस टाइम को दो घंटे से घटाकर और कम कर देगी। वर्तमान में पंचकूला से बटालियन मंगवानी पड़ती है। हिमाचल में ही स्थापना होगी तो रियल टाइम रिस्पांस हो सकेगा।
इसके लिए जल्द ही जमीन का चयन होगा। उल्लेखनीय है कि अगस्त 2018 में प्रदेश में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की एक बटालियन स्थापित करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी।
हिमाचल मंत्रिमंडल ने बाकायदा प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया था। जुलाई 2016 में भारत सरकार ने कांगड़ा के जाच्छपुर (नूरपुर) में एनडीआरएफ बठिंडा की एक टुकड़ी को स्थापित किया था।
इसे नाकाफी माना गया। केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद गृह मंत्रालय ने पिछले मई महीने में भी हिमाचल में एनडीआरएफ बटालियन स्थापित करने के आदेश दिए हैं।
अब इसके लिए ऐसे स्थान पर जमीन देखी जा रही है, जहां से किसी आपदा की स्थिति में रिस्पांस टाइम घटे। ऐसे में मंडी के बल्ह में बटालियन खोले जाने पर सर्वसम्मति बनती नजर आ रही है।