हिमाचल प्रदेश सरकार ने नगर निगम सदन में पांच पार्षदों को मनोनीत कर दिया है। इस बारे में बुधवार को अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। शहर के लोअर बाजार से कांग्रेस नेता एवं कारोबारी अश्वनी कुमार सूद, ढली से गोपाल शर्मा, कृष्णानगर से विनोद भाटिया, मालरोड से गीतांजलि भागड़ा और लोअर बाजार से राजकुमार को नगर निगम सदन में पार्षद मनोनीत किया गया है। नगर निगम चुनाव के समय इनमें से कई टिकट के दावेदार भी थे। कुछ अपनी पत्नियों के लिए टिकट की मांग कर रहे थे। पार्टी ने इन्हें टिकट नहीं दिया था।
अब इन्हें मनोनीत कर सदन में भेज दिया है। हालांकि, हैरानी की बात ये है कि शहर के कोर एरिया से ही सभी पार्षद मनोनीत हुए हैं। यही नहीं, कृष्णानगर के विनोद भाटिया को छोड़कर बाकी चार पार्षद उन वार्डाें से मनोनीत किए गए हैं जहां पहले से कांग्रेस के पार्षद चुनकर सदन में पहुंचे हैं। माना जा रहा था कि कांग्रेस सरकार उन वार्डाें से पार्षद मनोनीत करेगी जहां भाजपा ने कब्जा जमाया है। फिलहाल सरकार की अधिसूचना के बाद अब ये पांचों मनोनीत पार्षद भी नगर निगम के पहले सदन में हिस्सा ले सकेंगे।
मनोनीत पार्षदों को मिलती हैं वित्तीय शक्तियां
नगर निगम के चुने हुए पार्षदों की तरह मनोनीत पार्षदों को भी वित्तीय शक्तियां दी जाती हैं। इनका कोई विशेष वार्ड नहीं होता। ये शहर में किसी भी वार्ड में विकास कार्य के प्रस्ताव तैयार कर नगर निगम को दे सकते हैं। हालांकि, इन्हें नगर निगम सदन में मतदान का अधिकार नहीं होता। बीती भाजपा सरकार ने करीब ढाई साल बाद नगर निगम में पार्षद मनोनीत किए थे। कांग्रेस ने नगर निगम पर कब्जा जमाने के पहले महीने के भीतर ही सदन में पांच मनोनीत पार्षद भेज दिए हैं।