सोसायटी ने अपने ऊपर लगाए आरोपों को निराधार बताते हुए इस आदेश को निरस्त करने की मांग की है। प्रार्थी सोसायटी के अनुसार वह वर्ष 2016 से बेरोजगार युवाओं को संगड़ाह, हरिपुरधार व शिलाई में अपने संस्थानों के माध्यम से आईटी व नॉन आईटी ट्रेड में प्रशिक्षण दे रहे हैं।
प्रशिक्षण सत्र 2017-18 में उनके संस्थानों में 221 दाखिले हुए। प्रार्थी के अनुसार अचानक सोसायटी के चेयरमैन कुलदीप सिंह के खाते में बेरोजगारी भत्ते वाली राशि गलती से आनी शुरू हो गई।
इस वर्ष मार्च महीने में इसकी शिकायत उसने संबंधित अधिकारियों सहित पुलिस में की। अप्रैल में रोजगार कार्यालय ने उसे 35,000 रुपये की राशि लौटाने व सोसायटी को ब्लैक लिस्ट करने के आदेश जारी कर दिए। हालांकि सोसायटी के चेयरमैन ने इस राशि को वापस भी कर दिया लेकिन इसे ब्लैक लिस्ट कैटेगिरी
से नहीं हटाया गया। कोर्ट ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान प्रथम दृष्टया पाया कि इस तरह के कथित घोटाले प्रदेश के अन्य स्थानों में भी हुए या हो रहे होंगे। कोर्ट ने आशंका जताई है कि हो सकता है कौशल विकास भत्ते का लाभ पात्र बेरोजगार प्रशिक्षुओं को न मिल रहा हो।