हिमाचल सरकार लंबे समय से एक ही हेलीकॉप्टर से काम चला रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी इसी में सवारी करते हैं और बर्फ से ढके रहने वाले दुर्गम एवं जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए भी इसी का इस्तेमाल होता है। यह हेलीकॉप्टर लीज पर लिया गया है। दूसरा हेलीकॉप्टर लीज पर लेना हिमाचल सरकार महंगा सौदा मान रही है।
इसीलिए इसकी हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। वर्तमान में हिमाचल सरकार के पास एकमात्र हेलीकॉप्टर है। ये 26 सीटर है। इसे पवन हंस से लीज पर लिया है। लीज वर्ष 2013 से 2017 तक चल रही है। इस हेलीकॉप्टर में मुख्यमंत्री प्रदेश के विभिन्न आवश्यक स्थलों से लेकर नई दिल्ली और अन्य बाहरी राज्यों की यात्रा करते हैं। लाहौल-स्पीति जिला बर्फबारी के कारण हर साल पूरी दुनिया से छह महीने के लिए कट जाता है।
किन्नौर और चंबा जिलों के कई क्षेत्र भी बर्फ से ढके रहते हैं। ऐसे में लाहौल-स्पीति, किन्नौर जिलों समेत तमाम दुर्गम क्षेत्रों की आपात सेवाओं के लिए इसी हेलीकॉप्टर को भेजा जाता है। कुछ वर्ष पहले सरकार के पास एक छोटा हेलीकॉप्टर था। बीच में ये खराब हो गया तो एक और छोटे हेलीकॉप्टर का प्रबंध किया गया। बाद में पवन हंस से बड़ा 26 सीटर हेलीकॉप्टर लिया गया। कई बार मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आवश्यक कार्यक्रम हों तो ये उनके जनजातीय क्षेत्रों में व्यस्त होने के कारण उपलब्ध नहीं होता और अनेक बार ये सीएम के साथ होता है।
ऐसे में आपात सेवाओं के लिए कोई विकल्प नहीं मिल पाता है। हालांकि, ऐसी स्थिति में अनेक बाद सरकार ने तात्कालिक तौर पर एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर की व्यवस्था भी की है। क्या हिमाचल सरकार का एक और हेलीकॉप्टर खरीदने या लीज पर लेने का कोई विचार है? इसके जवाब में मुख्य सचिव पी. मित्रा ने कहा कि अभी ऐसी कोई योजना नहीं है।