मैसर्स अदाणी पावर लिमिटेड की 280 करोड़ रुपये की अग्रिम प्रीमियम राशि लौटने के मामले में राज्य सरकार को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। इस मामले में अपील दाखिल करने में सरकार ने 22 दिनों की देरी की है।
मैसर्स अदाणी पावर लिमिटेड की 280 करोड़ रुपये की अग्रिम प्रीमियम राशि लौटने के मामले में राज्य सरकार को फिलहाल हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। इस मामले में अपील दाखिल करने में सरकार ने 22 दिनों की देरी की है। देरी माफी के आवेदन पर मुख्य न्यायाधीश एए सैयद व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने कंपनी को नोटिस जारी किया है। साथ ही खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेशों पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। मैसर्स अदाणी पावर लिमिटेड की ओर से जंगी-थोपन-पोवारी विद्युत परियोजना के लिए यह राशि राज्य सरकार के पास जमा की गई थी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह दो महीने के भीतर इस राशि को वापस करे।
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यह स्पष्ट किया था कि यदि राशि को दो माह के भीतर नहीं लौटाया तो नौ फीसदी सालाना ब्याज सहित राशि अदा करनी होगी। एकल पीठ के इस फैसले को सरकार ने अपील के माध्यम से खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है।
कैबिनेट ने 4 सितंबर, 2015 को प्रशासनिक विभाग द्वारा तैयार किए गए विस्तृत कैबिनेट नोट पर ध्यान देने के बाद इस राशि को वापस करने का निर्णय लिया था। अक्तूबर 2005 में राज्य सरकार ने 980 मेगावाट की दो हाइड्रो-इलेक्ट्रिक परियोजनाओं जंगी-थोपन-पोवारी पावर के संबंध में निविदा जारी की थी । मैसर्स ब्रैकेल कार्पोरेशन को परियोजनाओं के लिए सबसे अधिक बोली लगाने वाला पाया गया। इसे देखते हुए ब्रकेल ने प्रीमियम के रूप में 280.06 करोड़ रुपये की राशि राज्य सरकार के पास जमा की थी।