उसका मानना है कि इसकी वजह से सरकार के आदेशों को लागू करने में परेशानी होती है। साथ ही अगर इसे बंद किया जाए तो सरकार का काफी खर्च भी बचेगा। हालांकि दूसरा धड़ा इसको लेकर संशय में है। यही वजह है कि ट्रिब्यूनल के दो सदस्यों की नियुक्ति के लिए इसी वर्तमान सरकार की ओर से चलाई गई प्रक्रिया को न तो बंद किया गया है और न ही आगे बढ़ाया जा रहा है।
चयन समिति की ओर से संभावित सदस्यों का नाम प्रस्तावित कर सरकार को भेज दिया गया है जिसे अब सरकार को केंद्र को भेजना है। लेकिन प्रदेश सरकार ने करीब एक महीने से इस फाइल को न तो वापस किया है और न ही केंद्र को भेजा है। शासन के सूत्रों के अनुसार चुनावी असर के डर से अब सरकार इस मामले में चुनाव खत्म होने के बाद सरकार फैसला लेगी।