ऐसे में न तो एक्ट में संशोधन हुआ और न नए लोकायुक्त की नियुक्ति हो सकी। इस बीच चुनाव आ गए और भाजपा ने दृष्टिपत्र जारी कर दावा किया कि सरकार गठित होते ही नए लोकायुक्त की नियुक्ति की जाएगी।
सूत्रों की मानें तो सरकार और गृह विभाग ने नई सरकार के गठन के बाद लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया है। जाहिर है सरकार के लोकायुक्त पद के रिक्त रखने के बाद भ्रष्टाचार को लेकर सख्ती और गंभीरता के दावे पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए हैं।
जयराम मंत्रिमंडल ने शुरुआती दौर की एक बैठक में निर्णय लिया था कि भाजपा का स्वर्णिम हिमाचल दृष्टिपत्र 2017 आधिकारिक दस्तावेज होगा। निर्देश दिए गए थे कि नीतियों के निर्माण के दौरान दृष्टिपत्र में किए गए वायदों व बातों का ध्यान रखा जाए।
इसके बाद कई बिंदुओं को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के पहले बजट में जगह भी मिल गई, लेकिन लोकायुक्त की नियुक्ति पर कोई फैसला नहीं हो सका।