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विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच हिमाचल सरकार ने वापस लिया खेल विधेयक

Wed, 04 Apr 2018 10:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच जयराम सरकार ने वीरभद्र सरकार के कार्यकाल में पारित खेल विधेयक वापस ले लिया। सांसद अनुराग ठाकुर और एचपीसीए को लाभ देने का आरोप विपक्ष ने जयराम सरकार पर लगाया। 

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विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किये हैं। नारेबाजी के बीच खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने सदन में प्रस्ताव रखा, जिसे सत्तापक्ष ने ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित कर दिया। सरकार ने बेहतर खेल नीति बनाने का आश्वासन सदन को दिया। 

इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान भी विपक्ष ने सांसद अनुराग पर खेल माफिया का आरोप लगाते चर्चा की मांग उठाई। पीठ से अनुमति नहीं मिलने पर विपक्ष ने विरोध स्वरूप वॉकआउट किया। 

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विधेयक वापस लेने को नियम विरुद्ध बताया

प्रश्नकाल के बाद खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने सदन में इस विधेयक को वापस लाने का प्रस्ताव रखा तो विपक्ष ने तेवर तीखे कर लिये। तथ्यों के साथ सदन में पहुंचे विपक्ष के सदस्यों ने कारण बताए बिना विधेयक वापस लेने को नियम विरुद्ध बताया। बिल को पारित करने का ध्येय अनुराग ठाकुर को लाभ देना बताया।

वीरभद्र सरकार इस बिल के दायरे में अनुराग ठाकुर की अध्यक्षता वाले एचपीसीए को भी लाना चाह रही थी, मगर ये विधेयक राजभवन में मंजूरी के लिए लंबित था।इसके बाद जब खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने सदन में वीरभद्र सरकार के वक्त में पारित किए गए खेल विधेयक को वापस लेने का प्रस्ताव रखा।

विपक्ष के सदस्यों जगत सिंह नेगी, विक्रमादित्य सिंह, रामलाल ठाकुर चर्चा में हिस्सा लिया और इसका विरोध किया। सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा विधायक राकेश पठानिया ही चर्चा में शामिल हुए। 

मुकेश अग्निहोत्री ने उठाया ये मामला

उन्होंने बिल में तय प्रावधानों को सही ठहराया, लेकिन विपक्ष के सांसद अनुराग पर किये जा रहे हमलों की निंदा की। कांग्रेस विधायक आशा कुमारी ने इसे वापस लेने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं करने की बात की।

कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने भी नियम 175 और 176 के तहत कार्यवाही नहीं होने का मामला उठाया। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज ने हस्तक्षेप करते हुए सदन में स्पीकर की रूलिंग को लागू करने की बात की। इसके बाद खेल मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इस बिल से बेहतरीन व्यवस्थाएं नए विधेयक में होंगी। 

विपक्ष का सांसद अनुराग पर हमला

सदन की सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के सदस्य रामलाल ठाकुर ने प्रश्नकाल से पहले खेल संघों में सांसद अनुराग ठाकुर के बढ़ते दखल को लेकर नियम 62 में चर्चा मांगी। ठाकुर ने विद्या स्टोक्स को हॉकी इंडिया की हिमाचल इकाई से हटाने का मामला उठाया।

उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर ने ऊना में एक बैठक करवाकर स्टोक्स को नोटिस दिए बगैर ही इस पद को कब्जा लिया। इसके बाद अनुराग ने हॉकी इंडिया का अध्यक्ष बनने और फिर ओलंपिक एसोसिएशन की सरदारी अपने हाथ में लेने का शॉर्टकर्ट रास्ता तैयार कर लिया है।

ठाकुर के अलावा विक्रमादित्य सिंह और राजेंद्र राणा ने संयुक्त रूप से प्रस्ताव दिया। इस पर स्पीकर बिंदल ने कहा कि नियम 62 की चर्चा प्रश्नकाल के दौरान नहीं का निर्णय लिया। स्पीकर के न मानने पर राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ये सब सदन से बाहर चले गए। 

हरियाणा की तर्ज पर एक्ट बनाने की बात जमी नहीं : रामलाल

नयना देवी के कांग्रेस विधायक रामलाल ठाकुर बोले कि मंत्री ने कहा है कि हरियाणा की तरह यहां पर बिल बनाया जाना है। वहां पर मॉडल एक्ट आया है, उसे फालो किया जाएगा। हरियाणा के एक्ट में स्पोर्ट्स काउंसिल के माध्यम से आधारभूत ढांचे को विकसित करने की बात है।

इसमें ऐसा कुछ नहीं है जो पारित बिल में था। जो विधेयक पूर्व सरकार के कार्यकाल मेें पारित किया गया था, उसमें भी आधारभूत ढांचा विकसित करने की बात है। उन्होंने कहा कि एचपीसीए में हुई अनियमितताओं को उजागर करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को तंग करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी गई।

एचपीसीए को फायदा दिलाने की मंशा : विक्रमादित्य 

विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जो बिल वापस लिया जा रहा है। इसमेें सरकार की मंशा किसी विशेष एसोसिएशन को फायदा दिलाने की है। यह बिल 2015 में लाया गया था।

इसका मुख्य उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से खेल संगठनों में पारदर्शिता लाना है। लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप बिल बनाकर ही इसे पिछली सरकार के कार्यकाल में पारित किया गया।

इस कमेटी के अनुसार किसी भी मंत्री या पब्लिक सर्वेंट को प्रमुख पदों पर न रखने की बात की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित खिलाड़ियों को ही इसमें होना चाहिए। एचपीसीए की कार्यशैली से ये साफ हुआ है कि इसमें कई अनियमितताएं हुई हैं। 

क्रि केट मैचों से हिमाचल का नाम चमका : पठानिया 

नूरपुर से भाजपा के विधायक राकेश पठानिया ने कहा कि एचपीसीए का मामला कोर्ट मेें चल रहा है। 40 देशों में जब हिमाचल में हो रहे क्रिकेट मैचों को दिखाया जा रहा था तो विश्व के नक्शे पर हिमाचल का नाम कैसे उभरा?

इस पर एचपीसीए को हतोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होेंने रामलाल ठाकुर की ओर से अनुराग ठाकुर की बिलासपुर जिला के अध्यक्ष पद पर हस्तक्षेप करने पर उठाए मामले में कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अनुराग ठाकुर उनके सांसद भी हैं। 

बताना जरूरी क्यों वापस लिया जा रहा विधेयक : आशा 

डलहौजी से कांग्रेस की विधायक आशा कुमारी ने कहा कि वह व्यवस्था का प्रश्न उठा रही हैं कि जिस बिल को वापस लिया जा रहा है, उसके बारे में विधानसभा सदस्यों को जानकारी ही नहीं दी गई है।

इस बारे में नियमानुसार विधायकों को यह बताना जरूरी है कि इसे वापस क्यों लिया जा रहा है। बिल पर राजभवन में भी कोई फैसला नहीं लिया गया है। न ही इस पर राज्यपाल ने स्वीकृति ही दी है और न ही अस्वीकृति की ही कोई जानकारी मिली है।

बिल को वापस करने से पहले इसके कारण बताने चाहिए : नेगी 
किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने कहा कि नियम 176 के तहत बिल को वापस करने से पहले इसके कारण बताने चाहिए थे। इसे सब सदस्यों को वक्त से पहले सर्कु लेट किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया। ऐेेसे में विधेयक को पेश करने की मंजूरी नहीं दी जा सकती। 

जयराम और धूमल में गुप्त समझौता : अग्निहोत्री

कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि नियम 175 और 176 को पूरी तरह से देखने के बाद ही इसे विधानसभा में वापस लेने की मंजूरी दी जानी चाहिए थी। बाद में विधेयक को वापस लेने पर दूसरा बिल लाया जाना है। इस पर भी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

सदन से बाहर वाकआउट के दौरान अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि खेल विधेयक को वापस लेने के मामले में साफ लग रहा है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के बीच कोई गुप्त समझौता हुआ है। एक सरकार और दूसरे खेल संगठनों पर अपना कब्जा रखना चाहते हैं। 
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खेल विशेष पर कब्जा करने के लिए कांग्रेस लाई खेल विधेयक : धूमल

पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने खेल विधेयक को लेकर कांग्रेस के सदन से वाकआउट की निंदा की है। उन्होंने कहा कांग्रेस अपने पापों के कारण ऐसा माहौल पैदा करने की कोशिश करती है।

हमीरपुर में जिला भाजपा की बैठक के बाद धूमल ने कहा कि खेल विधेयक कांग्रेस सरकार ने राजनीति कारणों से बनाया था। उस समय भी विधानसभा में इसका विरोध हुआ था। क्योंकि कांग्रेस के लोग चाहते थे कि खेल विशेष पर उनका कब्जा हो जाए।

यदि उनमें वाकई क्षमता होती तो 42 और खेलें हैं जिनको वह आगे ले जा सकते थे। धूमल ने कहा कि प्रदेश की जनता जानती है कि कांग्रेस ने खेलों को आगे बढ़ाने का नहीं बल्कि दबाने का प्रयास किया है।

उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान सरकार के सहयोग से सारे खेल संगठन अपने क्षेत्र में बढ़िया काम करेंगे। केवल एक खेल का नहीं बल्कि सब खेलों का विकास होगा।

धूमल ने कहा कि जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से कांग्रेस का हाल तो ऐसा हो गया है कि उत्तर प्रदेश में दो लोस सीटों के उपचुनावों में अपने प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने को भूल कर सपा के प्रत्याशियों की जीत का जश्न मना रही है। 
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