शिक्षा मंत्री ने इस पर कहा कि शिमला, सिरमौर और चंबा जिला में इस समय शिक्षकों की सबसे अधिक रिक्तियां हैं। 2009 में आरटीई एक्ट के तहत स्कूल खोलने व चलाने के लिए मानक तय किए गए थे, जिसको दरकिनार किया गया।
स्कूलों में जेबीटी के 700 पदों को भरने में दिक्कतें आ रही हैं, क्योंकि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में बैचवाइज और एक्स सर्विसमैन सहित अन्य कोटे से भर्तियों को किया जा रहा है।
कोर्ट से शिक्षकों की भर्ती संबंधी मामले के शीघ्र निपटारे का आग्रह किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में 259 प्राइमरी, 24 हाई और 40 सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं।
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि सरकार सूखे के प्रति गंभीर है। उन्होंने कहा कि सरकार व विभाग का प्रयास है कि आने वाले समय में पीने के पानी की समस्या न हो। मंत्री ने यह जानकारी विधायक बलबीर वर्मा की ओर से पूछे गए प्रश्न के उतर में दी।
उन्होंने कहा कि सरकार सूखे को लेकर आने वाली चुनौती के प्रति गंभीर है। प्रयास करेंगे कि पीने के पानी की कमी न हो। मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने आनी के विधायक के सवाल के जवाब में कहा कि गत तीन सालों में आनी हलके में केवल एक उठाऊ पेयजल योजना फाटी कशोली ग्राम बारी तहसील निरमंड जिला
कुल्लू वर्ष 2015 में स्वीकृत हुई थी, इसका 70 फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया गया है। शेष 30 प्रतिशत कार्य एक महीने के भीतर पूरा होगा। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंडल आनी में अनुसूचित जाति उप योजना के अंतर्गत उठाऊ पेयजल योजना निशानी कुई-कोट, टोगी, गराहना गांव के लिए वर्ष 2012 में शुरू की गई थी।
शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि मॉडर्न स्लाटर हाउस शिमला पर फैसला नगर निगमा शिमला ही लेगा। कहा कि स्लाटर हाउस एग्रीमेंट 20 मई, 2019 को समाप्त होगा और इसे फिर से कंपनी को देना है या नहीं, इसका निर्णय नगर निगम ही लेगा।
मंत्री ने यह जानकारी विधायक अनिरुद्ध सिंह की तरफ से पूछे प्रश्न के उत्तर के उतर में दी। उन्होंने कहा कि स्लाटर हाउस चलाने वाली कंपनी की तरफ से निगम को 2.14 करोड़ अग्रिम पट्टा राशि 5 साल के लिए जमा करवाई गई है।
स्लाटरिंग फीस 403610 अभी तक जमा करवाई गई है और 38.26 लाख स्लाटरिंग फीस फरवरी, 2018 तक बकाया है, जिसे जमा करवाने का आश्वासन कंपनी ने दिया है।
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य व बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि मंडी जिले के नगवाईं में कंपनी को अंगूरी शराब बनाने के लिए दी गई जमीन का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले की जल्द सुनवाई हो, इसके लिए सरकार एडवोकेट जनरल से आग्रह करेगी।
महेंद्र सिंह ने यह जानकारी विधायक जवाहर ठाकुर की तरफ से पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी। उन्होंने कहा कि नगवाईं स्थित उद्यान विभाग की भूमि पर हिमाचल इंडेज लिमिटेड कंपनी ने एमओयू के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पिछले 16 सालों में कोई गंभीर प्रयास नहीं किए।
यह भूमि कंपनी को अंगूर से वाइन बनाने पर आधारित उद्योग के लिए दी गई थी। 2001 में भूमि का हस्तांतरण संबंधित कंपनी को कर दिया गया, लेकिन 2005 तक उक्त भूमि पर कोई भी कार्य नहीं किया गया।
मंत्रिमंडल की 21-09-2016 को हुई बैठक में उक्त भूमि में से एनएचएआई की तरफ से अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि के अतिरिक्त शेष भूमि कंपनी को लीज पर दिए जाने का निर्णय लिया गया।
यह भी फैसला लिया गया कि अगर कंपनी 4 वर्षों में समझौते का अनुपालना करने में असफ ल रहती है, तो लीज रद्द व समझौता अमान्य हो जाएगा। संबंधित कंपनी ने फ रवरी, 2017 में हाईकोर्ट में फि र से याचिका दायर की है।