भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल
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भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि सरकार दैनिक वेतनभोगियों और अनुबंधकर्मियों को नियमित करने में भी लेट हो गई है। कर्मचारियों को नियमित करने की अधिसूचना चुनाव के दौरान जारी की गई है। कर्मचारियों को प्रभावित करने का काम अच्छा सा फ्लेवर नहीं है। डाॅ. राजीव बिंदल ने कहा कि सुरेश कश्यप, जयराम ठाकुर और सुखराम चौधरी ने जो भी चुनाव प्रचार की रचना की है, उसका अनुसरण कर रहे हैं। कांग्रेस अगर गुटबाजी की बात करे तो छाछ तो बोले ही, छलनी भी बोले।
इसमें सौ-सौ छेद हैं। इससे ज्यादा वह नहीं कहेंगे। रविवार को शिमला में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बिंदल ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री कह रहे हैं कि हमारी सरकार के पास पैसा नहीं है, इसलिए जनता मन बना रही है कि वह भाजपा के साथ जाएगी। अब ये सवाल खड़ा कर रहे हैं कि मोदी की फोटो क्यों लगा दी। वे पानी के लिए 1,800 करोड़ रुपये निगम के लिए दें, 1,500 करोड़ रुपये रोपवे को भी दें और फोटो भी न लगाएं। 6,500 करोड़ रुपये स्मार्ट सिटी के लिए आए, उसका भी फोटो न लगाएं।
स्मार्ट सिटी के कारण कितने फुटपाथ बन गए तो भी फोटो न लगाएं। जिनकी फोटो लगाकर थोड़े दिन पहले तक वोट मांगे जाते थे, उन वीरभद्र सिंह के कांग्रेस के प्रचार में फोटो नहीं हैं। चार महीने पहले तक तो उनकी फोटो लगती थी। उन्हें तो इसका कष्ट है, इन्हें हो या न हो। इन्होंने एक वातावरण बनाया है कि युवाओं को पहली कैबिनेट में कुछ न कुछ दिया जाएगा। मोहभंग के बाद आज निगम क्षेत्र के अंदर जनता ने मन बनाया है कि भाजपा का कारपोरेशन बनेगा।
कुछ नेताओं को बहनों ने वार्डों में पकड़कर पूछा -1500 रुपये कहां गए
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि चार माह पहले जो सरकार सत्ता में आई और उसके सत्ता में आने का जो कारण बना, वे लोकलुभावन गारंटियां हैं। यह माना जा रहा था कि निगम के चुनाव के बहाने गारंटियां मिलें, परंतु मुख्यमंत्री और अन्य नेतागण इन गारंटियों पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। कुछ नेताओं को बहनों ने वार्डों में पकड़कर पूछा कि 1500 रुपये कहां गए। प्रदेश की 22 लाख महिलाएं पूछ रही हैं कि हमारे 1500 रुपये कहां गए।
एक लाख युवक पूछ रहे हैं कि पहली कैबिनेट में नौकरियां मिलनी थीं, वे कहां गईं। सेब के लिए कहा कि इसका मूल्य बागवान तय करेंगे। बाद में बागवानी मंत्री बोले कि ऐसा तो कभी हो ही नहीं सकता। यह तो मार्केट तय करती है कि सेब का मूल्य कितना होगा। 300 यूनिट बिजली का इंतजार भी सब लोग करते रह गए। कारपोरेशन के चुनाव के लिए गारंटियां नहीं हैं, बल्कि इरादे हैं।