एसडीएम देहरा धनवीर ठाकुर का कहना है कि प्रशासन को इसकी सूचना समय पर नहीं मिल पाई। उनके निधन का दुख है। महान कलाकार प्रताप चंद के गानों में कला और प्रदेश की संस्कृति की झलक साफ दिखाई देती थी।
लोकगायक प्रताप चंद शर्मा उर्फ प्रतापु की गायकी की विरासत को अब उनके पौत्र मोहित शर्मा संभाले हुए हैं। जनवरी 2018 में मोहित शर्मा ने दो कांगड़ी गीत ठंडी-ठंडी हवा जे झुल्दी, झुल्दे चीला दे डालू, जीना कांगड़े दा और मेरे कन्ने बोल लछिये गाने गाकर यू-ट्यूब पर अपलोड किए थे।
400 गीत लिखे, रिकॉर्ड पर 112 ही आ पाए, कॉपीराइट के लिए नहीं थे पैसे
पौत्र मोहित शर्मा ने बताया कि दादा ने करीब 400 गीत लिखे और गाए। लेकिन, रिकॉर्ड पर 112 गाने ही आ पाए जो पटियाला की संस्था ने शीर्षक ‘मेरी धरती मेरे गीत’ शीर्षक से प्रकाशित किए थे। उनके लिखे गानों को उनका परिवार कॉपीराइट नहीं करवा पाया। इस कारण उनके लिखे और गाए गाने गाकर कई गायक बुलंदियों पर पहुंच गए और दादा अंतिम समय तक गुमनामी के अंधेरे में रहने को मजबूर हुए।