राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में हाल ही में भारी बारिश से आई आपदा के लिए केंद्र सरकार की ओर से अभी तक किसी भी प्रकार की मदद प्राप्त नहीं हुई है। राज्य सरकार ने 2000 करोड़ की अंतरिम राहत राशि जारी करने के लिए केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा है। हिमाचल भयंकर त्रासदी के दौर से गुजर रहा है। अनुराग ठाकुर और जयराम ठाकुर को राजनीतिक हितों को परे रखते हुए केंद्र सरकार से इस राशि को दिलाने में प्रदेश सरकार की मदद करनी चाहिए।
बयान जारी कर नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) में हर वर्ष 360 करोड़ रुपये की राशि जारी की जाती है, जो केंद्रीय बजट से राज्य को मिलने वाला त्रैमासिक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ में 90ः10 के अनुपात में हर वर्ष हिमाचल को अपने हिस्से की 360 करोड़ रुपये की धनराशि जून और दिसंबर के महीने में दो किस्तों में मिलती है। केंद्र सरकार ने यह दोनों किस्तें इस बार जुलाई में ही राज्य सरकार को जारी की हैं।
उन्होंने कहा कि दूसरी किस्त राज्य को दिसंबर में बर्फबारी के दौरान होने वाले नुकसान की एवज में जारी की जाती है, जो इस बार केंद्र सरकार ने पहले ही जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि एसडीआरएफ के तहत हिमाचल प्रदेश की 315 करोड़ रुपये की बकाया धनराशि अभी भी केंद्र सरकार के पास पड़ी है, जिसे जल्द से जल्द जारी किया जाना चाहिए।
उन्होंने हिमाचल सरकार को आपदा राहत के तहत केंद्र सरकार की ओर से 400 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान किए जाने के केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। राजस्व मंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश को इस मानसून के मौसम में आपदा के कारण पैदा हुए हालात के लिए केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई राशि जारी नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि अनुराग ठाकुर केंद्र सरकार में मंत्री हैं और जयराम ठाकुर पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उन्हें तथ्यों की जानकारी होनी चाहिए तथा प्रदेश की जनता के सामने झूठ नहीं बोलना चाहिए। नेगी ने कहा कि इस त्रासदी के दौरान हिमाचल प्रदेश में सरकारी और निजी संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है। बिजली, सिंचाई और पेयजल परियोजनाओं के साथ-साथ सड़कों को भी भारी क्षति पहुंची है और इन सभी को पुनः स्थापित करने के लिए एक साल से अधिक का समय लगने की संभावना है।