प्रदेश में पशुपालन एवं डेयरी गतिविधियों को व्यापक बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं चलाई जा रही हैं। केंद्र सरकार से प्रदेश में शीघ्र 47.50 करोड़ से एक सॉर्टिड सीमन फैसिलिटी केंद्र को मंजूरी मिल गई है। इस केंद्र में देसी नस्ल की गाय के ऐसे इंजेक्शन तैयार किए जाएंगे, जिससे केवल बछड़ी ही पैदा होगी।
केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और हिमाचल सरकार 10 प्रतिशत धन देगी। सॉर्टिड सीमन फैसिलिटी केंद्र स्थापित करने के लिए कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के लमलैहड़ी में 740 कनाल भूमि का चयन कर लिया गया है। राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत केंद्र को मंजूरी मिली है।
कृषि का मशीनीकरण होने के बाद खेती में बैलों का प्रयोग काफी कम हो गया है। इससे बछड़े पैदा होने पर लोग उन्हें सड़क पर बेसहारा छोड़ देते हैं। इससे बेसहारा पशुओं की समस्या से छुटकारा मिलेगा। गरीबी रेखा से नीचे रह रहे किसानों को 85 प्रतिशत और अन्य किसानों को 60 प्रतिशत उपदान पर बकरियां उपलब्ध करवाई जा रही हैं। सरकार ने 6 करोड़ का प्रावधान किया है। गोकुल मिशन के तहत 11 करोड़ की लागत से मुर्रा नस्ल की भैंसों का फार्म और 34 करोड़ की लागत से गोकुल गांव स्थापित करने का भी निर्णय लिया है।
राज्य की सभी डेयरी सहकारी समितियों को चरणबद्ध तरीके से स्वचालित दूध संग्रह इकाई प्रदान की जाएंगी। प्रथम चरण में 40 नई स्वचालित दूध संग्रह इकाइयां और मिल्क एनालाइजर सहकारी समितियों को दी जाएंगी। दूध उत्पादकों की सुविधा के लिए जिला शिमला में दत्तनगर एवं जिला मंडी में चक्कर में 50 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता के दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
50 प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है। प्रदेश में दो करोड़ से साहिवाल और रेडसिंधी नस्ल की गायों के संरक्षण होगा। 11 करोड़ से साहीवाल और रेडसिंधी पशुधन प्रजनन फार्म स्थापित किया जाएगा। ग्रामीण विकास एवं पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि सरकार पशुपालन व्यवसाय के विस्तार के लिए 47.50 करोड़ से बनेगा सॉर्टिड सीमन फैसिलिटी सेंटर मंजूर कराया है। सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्टों पर काम कर रही है।