तहसील रोहड़ू के शीलगांव के किसान राकेश दुल्टा ने बताया कि उन्होंने खेत में स्नोपीस फली किस्म के परीक्षणों में लगभग सात क्विंटल प्रति बीघा की उत्पादकता प्राप्त की है। उच्च गुणवत्ता वाला यह उत्पाद नई दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी में 200-300 रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत से बिका। परिणामों से उत्साहित, राकेश दुल्टा अब साथी किसानों को स्नोपीस और अन्य विदेशी सब्जियों की व्यावसायिक खेती को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे।
ऊंची और मध्यम पहाड़ियों पर हो सकता है उत्पादन
डॉ. अशोक ठाकुर ने बताया कि विभिन्न विदेशी सब्जियों को सफलता पूर्वक मध्य और ऊंची पहाडिय़ों में उगाया जा सकता है। यह किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप हो सकता है। ये फसलें सेब और अन्य फलों की फसलों के साथ उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त हैं। केवीके शिमला के प्रभारी डॉ एनएस कैथ ने कहा कि सेब उगाने वाले क्षेत्रों का कम अवधि के उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों के साथ विविधीकरण पहाड़ी राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक वरदान बन सकता है।
सराहनीय हैं वैज्ञानिकों के प्रयास : कुलपति
नौणी विवि के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने कहा कि विश्वविद्यालय राज्य में बागवानी के विविधीकरण के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने वैज्ञानिकों से अधिक से अधिक किसानों को ऐसी विविधता रणनीतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया जो न केवल एक फसल पर उनकी निर्भरता कम करेगा बल्कि उनकी आय को बढ़ाने में मददगार होगा। निदेशक अनुसंधान डॉ. जेएन शर्मा और निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. राकेश गुप्ता ने भी वैज्ञानिकों के प्रयासों की प्रशंसा की।