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हिमाचल चुनाव: इस विधानसभा सीट पर चेले ने चटा दी गुरु को धूल

Tue, 19 Dec 2017 10:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हमीरपुर
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सियासत के अपने ही रंग हैं। राजनीति में कुछ भी संभव है। जिस गुरु ने राजनीति का ककहरा सिखाया आज उसी चेले ने अपने ही गुरु को सियासी मैदान में धूल चटा दी है। सुजानपुर सीट पर न मुख्यमंत्री प्रत्याशी का फैक्टर चला और न ही मोदी का मैजिक काम आया।
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बड़े नाम पर अकेले राजेंद्र राणा का रसूख ही भारी पड़ गया। प्रदेश की सबसे हॉट सीट सुजानपुर से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र राणा ने भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल को शिकस्त दे दी है। धूमल लगातार चार बार विधानसभा का चुनाव जीते हैं। दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन इस बार भाजपा दिग्गज धूमल पर कभी उन्हीं के शिष्य रहे राजेंद्र राणा भारी पड़ गए।

राजेंद्र राणा ने मतगणना के कुल 13 राउंडों में बढ़त का ऐसा क्रम जारी रखा जो एक भी राउंड में टूट नहीं पाया। हालांकि, बीच कुछ राउंड में भाजपा प्रत्याशी धूमल को कांग्रेस के राजेंद्र राणा से अधिक मत मिले, लेकिन वह बढ़त का क्रम नहीं तोड़ पाए। राणा कभी धूमल के हनुमान कहे जाते थे। उनका राजनीति में पदार्पण भी धूमल के कारण ही हुआ।
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साल 2007 में सत्तासीन होने पर धूमल ने ही राजेंद्र राणा को हिमाचल प्रदेश मीडिया बोर्ड का वाइस चेयरमैन बनाया, लेकिन कुछ समय के बाद ही राजेंद्र राणा को यह पद छोड़ना पड़ा। उन्होंने अब भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को हराकर प्रदेश की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। यह भी तब है जब भाजपा को प्रदेश में पूर्ण बहुमत मिला है।
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2012 में चौदह हजार मतों से जीते थे राणा

प्रेम कुमार धूमल ने साल 1984 में पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा। वह पहला ही चुनाव कांग्रेस के प्रत्याशी मेजर जनरल विक्रमजीत सिंह कंवर से हार गए। इसके बाद उन्होंने लोकसभा के चुनाव में साल 1989 में कांग्रेस प्रत्याशी नारायण चंद पराशर को 37 हजार मतों के अंतर से हराया।

इसके बाद धूमल ने लोकसभा के 1991 और 2007 के चुनाव में भी विजय हासिल की। विधानसभा का पहला चुनाव उन्होंने साल 1998 में जीता। इसके बाद साल 2003, 2007 और 2012 में विस का चौथा चुनाव जीता।

2012 में चौदह हजार मतों से जीते थे राणा
जब भाजपा ने राजेंद्र राणा को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया तो राणा अकेले पड़ चुके थे। साल 2012 में उन्होंने सुजानपुर विधानसभा सीट से बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ा। उस समय उनके सामने भाजपा की सीपीएस रहीं उर्मिल ठाकुर और कांग्रेस की सीपीएस रही अनीता वर्मा चुनाव मैदान में सामने थीं, लेकिन उन्होंने दोनों को धूल चटाते हुए 14166 मतों से विजय हासिल की।

चुनाव में यह बढ़त जिला हमीरपुर से सर्वाधिक और प्रदेश में चौथे नंबर पर रही। साल 2012 में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार बनी और राणा कांग्रेस के एसोसिएट विधायक बन गए। इस बीच साल 2014 में लोकसभा के चुनाव हुए। कांग्रेस ने हमीरपुर से जीत की हैट्रिक लगा चुके सांसद अनुराग ठाकुर के खिलाफ चुनाव मैदान में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी राणा को उतारा।

राणा को विधायक पद छोड़ना पड़ा। कांग्रेस ने राणा की धर्मपत्नी अनीता राणा को सुजानपुर सीट से उपचुनाव में बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उतारा। लोस चुनावों के दौरान देश में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर चल रही थी, उस वक्त कांग्रेस की अनीता राणा भाजपा के नरेंद्र ठाकुर से महज साढ़े पांच सौ मतों से चुनाव हार गईं। हार के बावजूद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने राजेंद्र राणा को प्रदेश आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से नवाजा।
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