आज तक के इतिहास में पांवटा साहिब में इतना असमंजस भरा चुनाव शायद ही कभी रहा हो। सुबह से शाम तक भाजपा, कांग्रेस व आप प्रत्याशियों के गणित बनते और बिगड़ते रहे हैं। इस बार हर रणनीति, विरोधियों को पीछे धकेलने की योजना रोज ही नया रंग बदल रही है। सबसे अहम बात ये है कि निर्दलीय नेता हर दिन चक्रव्यूह की रचना बदल रहे हैं। इस बार निर्दलियों को हल्के में आंकने वाले किसी भी राजनीतिक पार्टी के प्रत्याशी की जरा सी ढील जीत को हार में तबदील कर सकती है। कांग्रेस प्रत्याशी किरनेश जंग व भाजपा प्रत्याशी सुखराम चौधरी दोनों के गढ़ वाले क्षेत्रों व वोट बैंक पर घात लगाने वाले अन्य सात प्रत्याशी भी मैदान में हैं।
निर्दलीय प्रत्याशियों ने अपने गृह क्षेत्र के किले को मजबूत करने के बाद भाजपा व कांग्रेस पार्टी प्रत्याशियों के क्षेत्रों में जोरदार प्रचार अभियान से घुसपैठ शुरू कर दी है। आम आदमी पार्टी से दावेदार रहे व यूथ ब्रिगेड के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह मिक्का ने आप के पार्टी प्रत्याशी मनीष ठाकुर के साथ रहने का ही फैसला लिया है। यूथ ब्रिगेड का समर्थन पिछली बार भाजपा को मिला था। अब आप प्रत्याशी के साथ आने से शहरी क्षेत्र में आप पार्टी की स्थिति में सुधार हुआ है। ये भाजपा व कांग्रेस दोनों ही पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
भाजपा से निष्कासन के बाद बतौर निर्दलीय मैदान में उतरे मनीष तोमर आंजभोज गृह क्षेत्र की पंचायतों में खुद को मजबूत करने के बाद मैदान क्षेत्रों में प्रचार में जुटे हैं। आजाद प्रत्याशी रोशन लाल चौधरी गृह पंचायत भगानी के साथ ही बाहती समुदाय बाहुल वाली पंचायतों में जोरदार अभियान छेड़े हुए हैं। उनके साथ भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मदन मोहन शर्मा, भाजपा के पूर्व राज्य कार्यकारिणी सदस्य सुधीर गुप्ता व पूर्व मंडल महामंत्री अशोक चौधरी व राकेश कश्यप खुल कर प्रचार में जुटे हैं।
वहीं, आजाद प्रत्याशी सुनील चौधरी गृह पंचायत अजोली व आसपास पंचायतों के साथ शहरी क्षेत्र में प्रचार में जुटे हैं। मैदान में उतरे सबसे समाजसेवी युवा प्रत्याशी को बाहती समुदाय के साथ अन्य समुदाय व क्षेत्रों में भी अच्छा रुझान मिल रहा है। जबकि, बसपा की सीमा देवी, राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी प्रत्याशी अश्वनी वर्मा व रामेश्वर शर्मा भी प्रचार अभियान में डटे हैं।