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हिमाचल: प्रदेश में आगामी वर्ष से पूरी तरह अपनाई जाएगी ई-स्टांप प्रणाली

Wed, 10 May 2023 09:46 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

ई-स्टांपिंग प्रणाली को पूर्ण रूप से अपनाने से राज्य के राजस्व में भौतिक स्टांप पेपरों की छपाई पर प्रतिवर्ष खर्च हो रहे 30 से 50 करोड़ रुपये की भी बचत होगी। 
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में आगामी वर्ष से पूरी तरह ई-स्टांप प्रणाली से स्टांप पेपर की बिक्री सुनिश्चित की जाएगी। राज्य के अधिकृत स्टांप विक्रेताओं को एक वर्ष में भौतिक ई-स्टांप पेपर से ई-स्टांप प्रणाली अपनाने की समय सीमा तय की गई है। ई-स्टांपिंग प्रणाली को पूर्ण रूप से अपनाने से राज्य के राजस्व में भौतिक स्टांप पेपरों की छपाई पर प्रतिवर्ष खर्च हो रहे 30 से 50 करोड़ रुपये की भी बचत होगी। प्रदेश सरकार ने भौतिक स्टांप पेपरों की छपाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने तथा ई-मोड के माध्यम से ही स्टांप ड्यूटी एकत्रित करने का निर्णय लिया गया है। पहले से छपे स्टांप पेपर का उपयोग करने के लिए विक्रेताओं को 1 अप्रैल, 2023 से 31 मार्च, 2024 तक एक वर्ष का समय दिया गया है। इसके बाद पूर्ण रूप से केवल ई-स्टांप का ही इस्तेमाल किया जाएगा। प्रदेश सरकार की ओर से ई-स्टांप पेपर के लिए स्टांप विक्रेताओं को अधिकृत एकत्रीकरण केंद्रों के रूप में अधिकृत किया जाएगा। उपभोक्ताओं को लाभान्वित करने के लिए सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल) के पोर्टल पर ई-स्टांप तैयार किए जा सकेंगे।

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स्टांप विक्रेता को न्यूनतम कमीशन अदा कर इस पोर्टल के माध्यम से ई-स्टांप तैयार करने के लिए अधिकृत किया जाएगा। वर्तमान में स्टांप विक्रेताओं के लिए स्टांप पेपर विक्रय की अधिकतम सीमा 20,000 रुपये प्रतिदिन है और ई-स्टांप प्रणाली अपनाने से यह सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रतिदिन हो जाएगी। इससे स्टांप वेंडर भी लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का कहना है कि प्रदेश में ई-स्टांप प्रणाली वैसे तो वर्ष 2011 में शुरू की गई थी, लेकिन राज्य सरकार ने अब इस ई-मोड को पूर्णतः अपनाने का निर्णय लिया है। 500 रुपये मूल्य तक के स्टांप पेपर की छपाई के लिए 20 रुपये, 1000 से 5000 रुपये मूल्य के स्टांप पेपर के लिए 22 रुपये तथा 10000 से 25000 रुपये मूल्य के स्टांप पेपर 23 रुपये की लागत आती है। ऐसे में ई-स्टांप प्रणाली राज्य सरकार और आम लोगों दोनों के लिए ही लाभदायक सिद्ध होगी। राज्य सरकार ने पंजाब के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की तीन तहसीलों में ई-स्टांप मॉडल का भी अध्ययन किया है। यहां इस प्रणाली के उपयोग से व्यापार में सुगमता में सुधार आया है। इसके अलावा यदि मूल ई-स्टांप पेपर प्रमाण पत्र गुम हो जाता है तो ई-स्टांप प्रमाण-पत्र की अनुलिपि तैयार करने का कोई प्रावधान नहीं है। प्रत्येक स्टांप पेपर की एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है और यह छेड़छाड़ से पूरी तरह से सुरक्षित होता है।

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