इसमें कहा गया है कि आयोग को स्वतंत्र सचिव चाहिए। गज्जू सीएम कार्यालय में अटैच हैं। आयोग में स्वतंत्र अधिकारी की तैनाती की जा सकती है। अभी तक सीएस की ओर से आयोग को पत्र का जवाब नहीं मिला है। इसके बारे में मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि तबादले के बाद आयोग के सचिव के रिलीव न होने का मामला मुख्यमंत्री के समक्ष रखा है। प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी के अंत में पूरा होना है। सुरजीत को पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव कराने का अनुभव है। नए सचिव को आयोग के बारे में समझने के लिए समय लगेगा। आयोग का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव सिर पर हैं। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट में सुनवाई 30 दिसंबर को है।
अप्रैल में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव संभव
हिमाचल प्रदेश में अप्रैल में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव हो सकते हैं। पंचायतों के पुनर्सीमांकन, पुनर्गठन और नई मतदाता सूचियां बनाने में कम से कम दो महीने का समय लग सकता है। संस्थाओं का कार्यकाल जनवरी में पूरा होने जा रहा है। दो महीने के लिए सरकार को पंचायतों में प्रशासक की तैनाती करनी पड़ सकती है। ऐसे में यह चुनाव आगे अप्रैल तक खिसक सकते हैं।