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Himachal News: मुख्यमंत्री सुक्खू बोले- भू-तापीय विद्युत संयंत्र 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने में होंगे सहायक

Thu, 22 Jan 2026 07:14 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 तक राज्य को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे भू-तापीय विद्युत संयंत्र कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार देर शाम को सचिवालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 तक राज्य को ग्रीन एनर्जी स्टेट बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत राज्य की 90 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से की जाएगी।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटे भू-तापीय विद्युत संयंत्र कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जैसे दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। यह ऊर्जा शिमला, मनाली और केलांग जैसे शीत जलवायु वाले नगरों के लिए भी अत्यंत उपयोगी होगी, जहां सर्दियों में हीटिंग और गर्मियों में कूलिंग की निरंतर आवश्यकता रहती है। पर्वतीय क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा एक स्थिर बेस-लोड आपूर्ति प्रदान करती है, जो मौसम पर निर्भर नहीं होती। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल्लू जिला के मणिकरण और कसोल तथा मंडी जिला के तत्तापानी जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय ऊर्जा की अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। इन क्षेत्रों में सतही तापमान 57 से 97 डिग्री सेल्सियस तक पाया जाता है तथा यहां भू-तापीय ग्रेडिएंट भी अधिक है, जिससे ये क्षेत्र न केवल विद्युत उत्पादन बल्कि गर्म जल स्रोतों पर आधारित पर्यटन विकास के लिए भी अत्यंत उपयुक्त हैं।

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उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहले से ही जलविद्युत उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और अब राज्य जल, सौर तथा भू-तापीय ऊर्जा के समन्वित दृष्टिकोण के माध्यम से कोयला, डीजल और लकड़ी जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बदलते जलवायु परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए भू-तापीय ऊर्जा एक सतत, सुरक्षित और विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत सिद्ध हो सकती है, जो राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगी। भू-तापीय ऊर्जा के उपयोग से लकड़ी और जीवाश्म इंधनों की खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे वनों की कटाई पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इसके साथ ही तत्तापानी और मणिकरण जैसे क्षेत्रों में भू-तापीय स्पा, रिजॉर्ट और वेलनेस केंद्रों के विकास से पर्यटन तथा ईको-टूरिज्म को नया प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से ड्रिलिंग और संयंत्र संचालन जैसे क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
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