सीएम की कुर्सी गंवाने की रिवायत का आखिरकार मंडी ने अंत कर दिया है। विधानसभा की दस सीटों वाले मंडी जिले से चुने गए कई नेता सीएम की कुर्सी के नजदीक पहुंचकर चूकते रहे हैं। लेकिन इस बार छोटी काशी के जनादेश की धमक ने जिले की सिराज सीट से विधायक बने जयराम को सीएम बना दिया है।
इससे पूर्व प्रदेश की सत्ता के निर्धारण में अहम भूमिका निभाने वाले मंडी जिले में सियासी खींचतान तो बहुत होती लेकिन सूबे को सीएम देना कभी मुमकिन न हो पाया। लेकिन दशकों बाद राजयोग का सूखा आखिरकार समाप्त हो गया है। इससे पहले की बात करें तो मंडी की नुमाइंदगी सीएम की कुर्सी के करीब तो पहुंची लेकिन सियासी शह और मात के खेल में हर बार चित होती रही।
प्रदेश का मध्यक्षेत्र कहा जाने वाला मंडी जिला सांस्कृतिक विरासत और प्रदेश को राजस्व देने वाला बड़ा क्षेत्र भी है। यहां से कई कद्दावर नेता भी हुए। लेकिन सत्ता की बागडोर संभालने की स्थिति में कोई नहीं पहुंच पाया। जयराम की ताजपोशी से मंडी का यह क्रम टूट गया है।
60 के दशक के बाद 2012 तक हाथ लगी निराशा
60 के दशक से लेकर अब तक के राजनैतिक सफर में मंडी को कई बार ऐन मौके पर सियासी उलटफेर देखने पड़े। मंडी जिले को सीएम पद मिलने का सबसे पहला मौका डॉ यशवंत सिंह परमार के समय में आया था।
सिराज विधानसभा जो पहले चच्योट के नाम से जानी जाती थी, से कर्म सिंह दो बार जीते थे। इससे कांग्रेस में उनका कद बढ़ गया।
विधायक दल का बहुमत कर्म सिंह के साथ था, लेकिन ऐन मौके पर समीकरण बदलने से बाजी पलट गई। इस तरह डॉ. परमार मुख्यमंत्री बन गए। मंत्रिमंडल में ठाकुर कर्म सिंह को वित्त और लोनिवि का मंत्री पद मिला।
90 के दशक में सुखराम परिवार चूका
नब्बे के दशक में सुखराम परिवार पूरी तरह से मंडी की राजनीति पर हावी था। लगातार जीत के बाद 1993 के चुनावों की बारी थी। बड़े सियासी कद को देखते हुए पंडित सुख राम सीएम पद के दावेदार बने।
लेकिन दो कद्दावर नेताओं की बदौलत अंतिम क्षणों में मंडी के हाथों से सीएम पद की कुर्सी चली गई। कुछ ऐसा ही वर्ष 2012 में मंडी के बड़े नेता ठाकुर कौल सिंह के साथ भी हुआ। ऐन मौके पर बदले समीकरणों में कौल सिंह को सीट छोड़नी पड़ी थी।
जयराम ने पार की हर बाधा
इस दफा सीएम पद के लिए चल रही लॉबिंग के बीच मंडी जिले के भाजपा विधायकों की खेमेबाजी भी खुलकर सामने आई थी। विधायक विनोद कुमार और कर्नल इंद्र सिंह ने धूमल को हार के बावजूद भी खुला समर्थन दिया है।
इंद्र सिंह ने तो पत्रकार वार्ता कर धूमल के लिए सीट खाली करने का एलान कर दिया था। वहीं विनोद कुमार की समीरपुर में पहुंचने की बात सामने आई थी। लेकिन, जयराम ठाकुर ने आखिरकार इन बाधाओं को भी पार कर लिया।