प्रेसवार्ता में कहा कि मैं केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर एनएचएआई के अधिकारियों के कारनामे उजागर करूंगा। वह पूछना चाहते हैं कि मुआवजा कितने लोगों को मिला। उन्होंने आपदा प्रबंधन अधिकारियों पर भी सवाल खड़े किए कि वे बैठकें ही करते रहते हैं। फील्ड में जाकर असली स्थिति का मुआयना नहीं करते। अनिरुद्ध सिंह ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि शिमला-परवाणू, मंडी, कांगड़ा, जोगिंद्रनगर सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों में कटिंग और रिटेनिंग वॉल के दौरान लापरवाही बरती गई है। इसमें करोड़ों का घपला हुआ है, इससे दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है। कटिंग 90 डिग्री एंगल पर की जा रही है, जबकि रिटेनिंग वॉल मात्र 8-10 फुट की लगाई जाती है। इससे भूस्खलन और भवन गिरने की घटनाएं आम हो गई हैं।
उन्होंने दावा किया कि केवल शिमला में ही 700 से अधिक शिकायतें एसडीएम और डीसी कार्यालय में दर्ज हो चुकी हैं। अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह आम लोगों की जिंदगी, उनके घर, भावनाओं और भविष्य से जुड़ा सवाल है। सड़कें बनाना सराहनीय है, लेकिन जिनका नुकसान हुआ है, उनके लिए नीति कहां है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की एजेंसियों, एनएचएआई और ठेकेदारों के बीच साठगांठ है। वन, राजस्व और पर्यावरण भी अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। कई शिकायतों और नुकसान के बावजूद कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। भट्ठाकुफर में एनएचएआई अधिकारियों की लापरवाही से भवन गिरा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि सड़क निर्माण में प्रभावितों के लिए एक पारदर्शी और सशक्त नीति बनाई जाए। उन्होंने बताया कि इस विषय में उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री से फोन पर विस्तृत चर्चा की और उन्हें घटनास्थल पर आने को भी कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को तत्काल निर्देश भी दिए।
दिल्ली में इंजीनियरों ने किया प्रदर्शन
उधर, एनएचएआई के अधिकारी से मारपीट के मामले ने तूल पकड़ लिया है। केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मामले पर सख्त हो गए हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बात की और जिम्मेवार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। सीएम सुक्खू से बातचीत करने की जानकारी गडकरी ने खुद एक्स पर पोस्ट डालकर दी। इधर, दिल्ली में एनएचएआई मुख्यालय के बाहर अधिकारियों और इंजीनियरों ने जस्टिस फॉर अचल के बैनर लेकर प्रदर्शन करते हुए पूरी घटना पर रोष व्यक्त किया। गडकरी ने मुख्यमंत्री सुक्खू को भी इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी है। गडकरी ने सीएम को पत्र में इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की बात करते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार की ओर से इसमें गंभीरता नहीं बरती गई तो वर्तमान में चल रही और भविष्य की योजनाओं के पुनर्मूल्यांकन के लिए तत्पर होना पड़ेगा। गडकरी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज मंत्री और उनके सहयोगियों की ओर से एनएचएआई शिमला के प्रबंधक अचल जिंदल पर किया गया हमला अत्यंत निंदनीय है और कानून का अपमान है। अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन कर रहे एक लोक सेवक पर इस तरह का क्रूर हमला न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि संस्थागत अखंडता को भी नष्ट करता है। मंत्री गडकरी ने लिखा कि उन्होंने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से बात की है। उन्होंने सभी दोषियों के खिलाफ तत्काल और अनुकरणीय कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए और बिना देरी के न्याय मिलना चाहिए।
जस्टिस फॉर अचल के बैनर लेकर प्रदर्शन
शिमला में एनएचएआई के अधिकारी के साथ मारपीट के विरोध में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन हुआ। मुख्यालय के बाहर अधिकारियों और इंजीनियरों ने जस्टिस फॉर अचल के बैनर लेकर प्रदर्शन करते हुए पूरी घटना पर रोष व्यक्त किया। इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह पिछले पंद्रह से बीस वर्षों में पहली घटना है, जब किसी स्टेट मिनिस्टर ने एनएचएआई के अधिकारियों के साथ मारपीट की है। देशभर के इंजीनियर इसका विरोध करते हैं।