विपक्ष के रवैये से मुख्यमंत्री जयराम नाराज हुए। वॉकआउट पर जयराम ने सदन में कहा कि विपक्ष बेवजह नियम 67 में उन विषयों को ला रहा है, जो इस नियम में उठाए नहीं जा सकते। प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होने से पहले ही विपक्ष काफी आक्रामक नजर आया।
कांग्रेस विधायक दल के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने सीएम पर कांग्रेस विधायकों को धमकाने का आरोप लगाया। इस पर सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्होंने धमकी नहीं दी। इसी बीच दोनों ओर नोकझोंक होती रही, लेकिन प्रश्नकाल शुरू हो गया और मंत्रियों ने कई सवालों केे जवाब देना शुरू किए।
ठीक 12 बजे जैसे ही प्रश्नकाल खत्म हुआ, वैसे ही शिलाई से कांग्रेस विधायक हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि विपक्ष के विधायक जगत सिंह नेगी और नंदलाल की ओर से नियम 67 के तहत एक स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा को नोटिस दिया गया है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे महकमों में हो रहे तबादलों पर चर्चा मांगी गई है।
सेवानिवृत्त लोगों और विधवाओं के भी स्थानांतरण हो रहे हैं। नियमानुसार दो साल की सेवानिवृत्ति से पहले तबादले नहीं हो सकते। स्पीकर राजीव बिंदल ने साफ किया कि नियम 67 के तहत ये चर्चा नहीं हो सकती। विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और किन्नौर के कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी ने भी नियम 67 पर चर्चा करवाने पर जोर दिया।
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज ने भी कहा कि किसी और नियम पर सरकार चर्चा को तैयार है, लेकिन विपक्ष नारेबाजी करता रहा और वाकआउट कर सदन से बाहर आ गया। फिर सदन की सारी कार्यवाही बगैर विपक्ष के ही चलती रही। भोजनावकाश से पहले ही सदन की बैठक दूसरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
विपक्ष की गैरमौजूदगी में सरकार ने 3327 करोड़ के अनुपूरक बजट मांगों के हिमाचल प्रदेश विनियोग विधेयक 2018 को पारित किया। अध्यक्ष बिंदल के विधेयक पर चर्चा के अवसर देने पर भी किसी ने उसमें भाग नहीं लिया।
बिना चर्चा के ही विधेयक पारित हुआ। इससे पहले औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में दो सदस्यों को सीनेट में मनोनीत करने का प्रस्ताव बागबानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने दिया।