18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों में खुलेंगे प्री प्राइमरी स्कूल
हिमाचल प्रदेश के 18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों में प्री प्राइमरी स्कूल खोले जाएंगे। यहां तीन से छह साल के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता बच्चों की शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाने की है। इसी कड़ी में एक अप्रैल 2025 से सभी 18,925 आंगनबाड़ी केंद्रों को आंगनबाड़ी सह प्री-स्कूल के रूप में नामित करने का फैसला लिया गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा एससीईआरटी सोलन की ओर से विकसित पूर्व प्राथमिक पाठ्यक्रम तथा राष्ट्रीय जन सहयोग एवं बाल विकास संस्थान नई दिल्ली की ओर से विकसित आधारशिला राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा महिलाओं के बीच छोटे बच्चों के समुचित ब्रेस्टफीडिंग और पूरक भोजन तकनीकों के बारे में जागरुकता की कमी है। प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं में हुई व्यापक वृद्धि के बावजूद छोटे बच्चों के स्वास्थ्य मानकों में आ रही गिरावट के कारणों को समझने की दृष्टि से सरकार ने पिछले दिनों एक व्यापक कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास निदेशालय के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
प्रदेश में वर्षों से चल रहे पूरक पोषाहार कार्यक्रम में भी बदलाव लाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसको देखते हुए इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत हर आंगनबाड़ी में पूरक पोषाहार को और अधिक पौष्टिक बनाने के लिए विशेषज्ञों की राय से पूरक पोषाहार को लाभार्थियों में आवंटित किया जाएगा। सुनिश्चित किया जाएगा कि जहां तक संभव हो पूरक पोषाहार का क्रय विकेंद्रीकृत किया जाएगा। इस पर प्रतिवर्ष 65 करोड़ रुपये अतिरिक्त धनराशि व्यय होगी। स्वास्थ्य, जल शक्ति, ग्रामीण विकास तथा शिक्षा विभाग में वर्तमान में चल रहे संबंधित कार्यक्रमों में सामंजस्य स्थापित कर एक समेकित कार्यक्रम चलाने की दृष्टि से एक समन्वय कमेटी का गठन किया जाएगा। फील्ड लेवल पर आशा वर्कर व आंगनबाड़ी वर्कर के बीच भी बेहतर तालमेल बैठाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीपीएल परिवार में जन्म लेने वाली दो बालिकाओं के लिए इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना शुरू की जाएगी।
यह बेटी है अनमोल योजना को और अधिक सशक्त करेगी। इसमें बालिका के जन्म पर 25 हजार रुपये की राशि बीमा कंपनी में जमा करने की व्यवस्था होगी। बालिका के माता-पिता को जीवन बीमा का लाभ भी देय होगा जो प्रति अभिभावक दो लाख रुपये होगा। बीमा की मैच्योरिटी पर देय राशि बालिका को 18 या उसकी स्वेच्छा से 27 वर्ष तक की आयु तक दिए जाने का प्रावधान होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 8 पेंशन योजनाएं सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं। इन पर चालू वित्तीय वर्ष के दौरान एक हजार 410 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इनसे 8 लाख 24 हजार 928 व्यक्ति लाभान्वित हुए। 2025-2026 के दौरान सामाजिक पेंशन योजना में 37 हजार नए लाभार्थियों को शामिल किया जाएगा तथा इसके लिए लगभग 67 करोड़ का अतिरिक्त व्यय किया जाएगा। सरकारी कर्मचारी/पेंशन भोगियों और आयकर दाता दिव्यांगजनों को छोड़कर सभी दिव्यांगजन जिनकी बैंचमार्क विकलांगता 40 प्रतिशत या अधिक है उनको सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना प्रदान की जाएगी।
सामाजिक सुरक्षा पेंंशन के वितरण से पारदर्शिता और इसे प्रभावी बनाने के लिए आगामी वित्त वर्ष में एक एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल/प्लेटफार्म लांच किया जाएगा। इसके माध्यम से हिम परिवार रजिस्टर नकल, राजस्व रिकॉर्ड आय प्रमाणपत्र आदि को ऑनलाइन लिंक किया जाएगा। इसी के माध्यम से ग्रामीण विकास विभाग, शहरी विकास विभाग और भवन निर्माण एवं श्रम कल्याण बोर्ड से एनओसी प्राप्त करने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेष योग्यता वाले बच्चों के लिए संस्थान सुंदरनगर की तर्ज पर राज्य बाल कल्याण परिषद से विशेष बच्चों के ढली संस्थान को कर्मचारियों सहित सरकार के अधीन लिया जाएगा। स्वर्ण जयंती आश्रय योजना के तहत, अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के बेघर पात्र व्यक्तियों को नए मकान के निर्माण के लिए एक लाख 50 हजार की वित्तीय सहायता दी जाती है। निर्माण लागत और महंगाई को देखते हुए, सरकार इस योजना अंतर्गत गृह निर्माण के लिए अन्य योजनाओं से समन्वय करते हुए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध करवाएगी।
समाज में छुआछूत की प्रथा को दूर करने के उद्देश्य से अंतरजातीय विवाह के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को 50 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मुख्यमंत्री ने घोषणा की। विकलांग व्यक्तियों के विवाह के लिए प्रोत्साहन नामक उप योजना के तहत 70 प्रतिशत से अधिक विकलांगता वाले दिव्यांगजनों के विवाह के लिए विवाह प्रोत्साहन राशि 50 हजार से बढ़ाकर 2 लाख रुपये की गई। मुख्यमंत्री विधवा एवं एकल नारी आवास योजना के तहत आगामी वित्त वर्ष में नए लाभार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य रखा है, जिस पर 5 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्तमान में "द्धजनों के लिए एकीकृत योजना के अंतर्गत 9 वृद्ध आश्रम चला रही है। इस योजना को आगे बढ़ाते हुए 2025-2026 के दौरान प्रदेश के अन्य स्थानों पर निजी क्षेत्र की भागीदारी से वृद्ध आश्रम/वरिष्ठ नागरिक गृह स्थापित किए जाएंगे। सरकार नीति आयोग के साथ मिलकर जिला ऊना में पायलट आधार पर चलाए जाने वाले विंग्स प्रोजेक्ट को पूरा सहयोग देगी ताकि हमारी महिलाओं व बच्चों के लिए एक स्वस्थ भविष्य का निर्माण संभव हो सके। मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा, महिला, बाल, एवं अन्य पिछड़ा वर्गो के कल्याण के लिए कुल 2 हजार 533 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है।
तीन और नशा रोकथाम एवं नशा मुक्ति सह पुनर्वास केंद्र किए जाएंगे स्थापित
-मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्तमान में राज्य में जिला कुल्लू में दो व हमीरपुर, ऊना और कांगड़ा में एक-एक इंटीग्रेडिट नशामुक्ति केंद्र चला रही है। राज्य में मादक पदार्थों की लत और तस्करी की बढ़ती समस्या को देखते हुए और अधिक ऐसे केंद्रों की आवश्यकता है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2025-2026 में राज्य में 3 और नशा रोकथाम एवं नशामुक्ति-सह-पुनर्वास केंद्र स्थापित किए जाने प्रस्तावित हैं। प्रदेश अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विकास निगम के माध्यम से स्वरोजगार और विभिन्न लघु उद्यमों आदि के लिए कम ब्याज दर पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए परिवार की निर्धारित वार्षिक आय को मौजूदा 35 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया है।
132 करोड़ की लागत से हिमाचल में 13 स्थानों पर बनाए जाएंगे वर्किंग वुमन हॉस्टल
मुख्यमंत्री ने कहा कि काम-काजी महिलाओं की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से 2025-2026 में 132 करोड़ रुपए की लागत से सोलन, नीरी, दरुही, पालमपुर, लुथान, बद्दी, गगरेट, नगरोटा बगवां, चनौर इंडस्ट्रियल एरिया और मेडिकल डिवाइस पार्क सोलन में कुल 13 वर्किंग वुमन हॉस्टलों का निर्माण किया जाएगा।