मुख्यमंत्री जयराम ने अपने बजट में एलान किया है कि दूसरे प्रदेश से लगती सीमाओं की तीसरी आंख से निगरानी की जाएगी। इसके लिए 150 उन अतिसंवेदनशील स्थानों को चिह्नित कर हाई रेजोल्यूशन वाले अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे जहां मादक पदार्थों, वन संपदा व अन्य तरही की तस्करी होने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है। वहीं, नशे की तस्करी रोकने और प्रभावी तरह से नजर रखते व कार्रवाई करने के लिए हर पुलिस जिले में आधुनिक तकनीक से लैस टेक्निकल सेल गठित होंगे।
अब रिपोर्टिंग चौकियों पर भी दर्ज कराएं अपनी एफआईआर
शिमला। हिमाचल की भौगोलिक स्थिति और पहुंच बनाने में हो रही मुश्किलों के बीच जयराम सरकार ने लोगों की सुविधा के लिए बड़ा एलान किया है। इसके तहत पुलिस थानों के साथ साथ अब क्षेत्र की पुलिस चौकी में भी लोग अपनी प्राथमिकी दर्ज करा सकेंगे। जयराम सरकार सूबे की सौ पुलिस चौकियों को रिपोर्टिंग चौकी बनाएगी ताकि इन चौकियों के आसपास के लोगों को कई किलोमीटर दूर थानों तक सिर्फ अपनी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए नहीं जाना पड़ेगा। सरकार के इस फैसले से न सिर्फ लोगों की मेहनत बचेगी बल्कि थाने आने जाने में होने वाले वित्तीय बोझ भी खत्म हो जाएगा।
जांच अधिकारियों की कमी की वजह से जांच प्रभावित हो रही थी। जांचों में होने वाली देरी और जांच अधिकारियों पर पड़ रहे बोझ को कम करते हुए प्रदेश सरकार ने मुख्य आरक्षियों को जांच में भी भागीदार बनाने का फैसला लिया है। जयराम सरकार ने इस संबंध में बड़ा कदम उठाने का फैसला लिया है। इसके तहत कानून में संशोधन कर आबकारी अधिनियम 2011 के तहत दर्ज मामलों की जांच मुख्य आरक्षियों को भी अधिकृत करेगी। इसके अलावा स्नातक आरक्षियों को तीन साल या उससे कम सजा वाले अपराध से जुड़े या केवल जुर्माने वाले मामलों की जांच के लिए प्राधिकृत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे जांच अधिकारियों का बोझ कम होगा और वह जघन्य अपराधों की जांच को प्रभावी तरीके से पूरा कर पाएंगे।
तकनीक का होगा ज्यादा इस्तेमाल
बजट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि जांच में तकनीक का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश भर में फोरेंसिक नेटवर्क में सुधार करने की बात कही। एलान किया उत्तरी रेंज के रूपपुर और दक्षिणी रेंज के पुलिस जिला बद्दी में एक एक जिला मोबाइल फोरेंसिक यूनिट स्थापित की जाएगी।