लोकसभा चुनाव के लिए पंडित सुखराम के पोते आश्रय शर्मा मंडी से टिकट मांग रहे थे। मगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो वह कांग्रेस के साथ हो लिए। हमीरपुर से पूर्व सांसद सुरेश चंदेल टिकट की मांग कर रहे थे, पर वह भी अब कांग्रेस के संपर्क में हैं।
इसी तरह से शिमला से वीरेंद्र कश्यप का टिकट कटा है। वीरेंद्र कश्यप ने अभी तक अपना अगला रुख स्पष्ट नहीं किया है। शिमला से भाजपा के चुनाव प्रकोष्ठ के संयोजक एचएन कश्यप भी टिकट मांग रहे थे। वह भी खामोश बैठे हैं।
मंडी से ही ब्रिगेडियर खुशाल सिंह को भी टिकट नहीं मिल पाया है। इसी तरह से कांगड़ा से त्रिलोक कपूर, दूलो राम और कई अन्य दावेदारों को भी टिकट नहीं मिल पाए हैं। हालांकि, इनमें से ज्यादातर नेता पार्टी आलाकमान के आदेश को दबे स्वरों में स्वीकार भी कर रहे हैं।
बीते विधानसभा चुनाव में पांच सिटिंग विधायकों के टिकट कटे थे। ये झंडूता से रिखीराम कौंडल, चंबा से बीके चौहान, अर्की से गोबिंद राम शर्मा, भोरंज से डॉ. अनिल धीमान और इंदौरा से मनोहर धीमान हैं।
मनोहर धीमान ने निर्दलीय विधायक रहते टिकट की आस में भाजपा का दामन थामा था, मगर उनका टिकट भी कट गया। सुंदरनगर से पूर्व मंत्री रूप सिंह ठाकुर और चंबा से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष तुलसीराम भी टिकट से वंचित रखे गए। हालांकि इनमें से कुछ नेता भाजपा के लिए प्रचार कर रहे हैं, मगर कई नेता खामोश बैठे हैं।