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शीतकालीन सत्र: सदन से बाहर आते ही तल्ख हो गए विपक्ष के तेवर

Tue, 20 Dec 2016 09:07 AM IST
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला
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तपोवन में सरकार के अंतिम शीतकालीन सत्र का पहला दिन दिवंगत विधायक एवं पूर्व मंत्री आईडी धीमान को श्रद्धांजलि देने के लिए शांत रहा, लेकिन बाहर आते ही विपक्ष के तेवर तल्ख हो गए। शीत सत्र के पहले दिन सदन में आते ही मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विपक्ष के सभी सदस्यों के साथ हाथ मिलाया। 
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल समेत अन्य सदस्यों ने गमगीन मुद्रा में दिवंगत विधायक आईडी धीमान को श्रद्धांजलि दी। सदन के बाहर आते ही धूमल ने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में सरकार पर जमकर हमला बोला। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को हर मोर्चे पर असफल करार दिया। कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था और विकास के मामले में सरकार फेल है। 

धूमल ने बोला सरकार पर हमला

कहा कि बंजार में आईएसआईएस का एजेंट कई महीनों तक रहा और सरकार को इसकी खबर तक नहीं लगी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में कानून व्यवस्था का क्या हाल है। संदिग्ध को आखिर कौन पैसा देता था। ऐसा लगता है कि बाहर से आने वाले लोगों पर सरकार की नजर नहीं है।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने प्रदेश को 61 एनएच दिए, लेकिन सरकार इनकी डीपीआर तक नहीं बना पाई। डीपीआर के खर्चे को केंद्र ने तो 261 करोड़ मंजूर किए हैं, जबकि कांग्रेस कहती है कि पैसा नहीं मिला। सरकार डीपीआर ही नहीं बनाएगी तो उसे पैसा कैसे मिलेगा। सरकार में काम करने की इच्छाशक्ति नहीं है। 

उधर, होटल धौलाधार में विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने भी विपक्ष पर सीधा हमला बोला। कहा कि विपक्ष आदर्शवादी नहीं है। हंगामा करना और झूठ बोलना विपक्ष की फितरत है। ऐसे में शीत सत्र के पहले दिन सदन के अंदर तो शांति रही, लेकिन बाहर दोनों पक्षों ने तल्खी दिखाई।
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सदन में पहली बार अपने गुरु के बिना धूमल

वर्ष 1990 में चुनाव जीतकर शिक्षक से राजनेता बने आईडी धीमान की कमी उनके शिष्य रहे धूमल को सदन में खूब खली। ऐसा पहली बार हुआ कि सदन में धूमल आईडी धीमान के बिना दिखे। वर्ष 1956-57 में हमीरपुर के डीएवी टौणी देवी में टीजीटी ईश्वर दास धीमान सातवीं कक्षा को गणित और विज्ञान पढ़ाते थे। इस कक्षा में धीमान के शिष्य प्रेम कुमार धूमल भी थे। 

30 वर्ष बाद अपने इसी शिष्य के आग्रह पर आईडी धीमान ने सरकारी नौकरी छोड़कर चुनाव लड़ा। वर्ष 1990 से धीमान लगातार 16 वर्ष तक सदन के सदस्य रहे। धूमल कहते हैं कि निधन से दो दिन पूर्व वे आईडी धीमान से मिले थे। वह अस्वस्थ थे। धीमान कम बोलते थे, लेकिन वह सारगर्भित होता था। सदन में भी वह गुरु की तरह मार्गदर्शक बने रहे। वे गुस्सा नहीं हमेशा समस्या का समाधान करने की कोशिश करते थे।
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