वर्ष 1971 में जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं तो डॉ. परमार ने रिज मैदान से हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की घोषणा कराई थी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश की संस्कृति, बोली और मेलों का संरक्षण किया। हिमाचल को पंजाब में लिया जा रहा था, लेकिन परमार ने ऐसा नहीं होने दिया। भू सुधार अधिनियम उन्हाेंने लाया। अगर इसकी धारा 118 न होती तो हिमाचल भी बिक गया होता। वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि भारत रत्न के अलग-अलग मापदंड होते हैं।
अब तक 53 महान विभूतियों को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। विधानसभा में प्रस्ताव लाने के बजाय सरकार सीधे केंद्र से भी सिफारिश कर सकती थी। डॉ. परमार को भारत रत्न देने के लिए विधानसभा के सभी सदस्य एक हैं। यह बात पहले होनी चाहिए थी। चलो देर से सही, उचित है। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि पहले विधानसभा में बैठने के लिए बेंच लगे होते थे। 1985 में यहां कुर्सियां लगाई गईं। धीरे-धीरे इसका स्वरूप बदल गया। हममें से किसी ने परमार के साथ काम नहीं किया है। यह मान-सम्मान देने की बात है।